सरकारी स्कूलों में तैनाती, अफसरों के दफ्तरों में ‘सेवा’



जिले के 72 ऑपरटेरों की व्यथा-कथा, शिक्षक डेटा अपलोड में उलझे, पढ़ाई हो रही बुरी तरह प्रभावित

जबलपुर। स्कूल शिक्षा विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटरों की तैनाती को लेकर गंभीर अनियमितताएँ सामने आई हैं। जबलपुर जिले के 72 सरकारी स्कूलों में पदस्थ अॉपरेटर स्कूलों में उपस्थित नहीं होते, बल्कि विभागीय अधिकारियों के दफ्तरों में काम कर रहे हैं। इससे स्कूलों में आवश्यक ऑनलाइन कार्य शिक्षक और प्राचार्य स्वयं कर रहे हैं, जिससे शिक्षण गतिविधियाँ प्रभावित हो रही हैं। सूत्रों के अनुसार अॉपरेटरों को स्कूलों में पदस्थ दिखाया गया है, लेकिन वे डीईओ, जेडी, बीईओ, डीपीसी और डाइट कार्यालयों में अधिकारियों की सहायता कर रहे हैं। वहीं दैनिक रूटीन में स्कूलों को भोपाल समेत कई कार्यालयों को डेटा और रिपोर्ट भेजनी होती है, जिसे अब शिक्षक स्वयं पूरा कर रहे हैं।

-आउटसोर्सिंग कंपनी पर भी सवाल

ऑपरेटरों की नियुक्ति आउटसोर्सिंग एजेंसी एमपी कॉर्न कंपनी के माध्यम से हुई थी। कंपनी को इस व्यवस्था की जानकारी होने के बावजूद उसने अब तक कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया है। इस कारण कंपनी की भूमिका पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। कई प्राचार्य तकनीकी जानकारी न होने के बावजूद ऑनलाइन रिपोर्टिंग, पोर्टल एंट्री और रेमेडियल क्लास डेटा स्वयं भर रहे हैं। शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि भी इस मामले पर अब तक कोई प्रतिवाद नहीं कर पाए हैं, जिससे स्कूल स्टाफ में असंतोष बढ़ रहा है।

-कर्मचारी संगठनों की चुप्पी चर्चा में

शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारी संगठन अक्सर प्रशासनिक निर्णयों पर प्रतिक्रिया देते रहे हैं, लेकिन इस मुद्दे पर उनका सन्नाटा कई सवाल खड़े कर रहा है। कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच संभावित समझौते की चर्चाएँ विभाग में चल रही हैं।

-रिपोर्ट मांगी जाएगी

मामले की जानकारी मेरे संज्ञान में आई है। इस पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी।

- डी.एस. कुशवाह, संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय

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