निजी ऑपरेटरों को सौंपने का विरोध तेज,उपभोक्ता संगठनों ने जताई कड़ी आपत्ति
जबलपुर। प्रस्तावित जनबस सेवा को निजी ऑपरेटरों के हवाले करने की योजना के खिलाफ उपभोक्ता संगठनों ने विरोध तेज कर दिया है। उपभोक्ता अधिकार मंच व अन्य संगठनों ने कहा है कि प्रदेश सरकार की यह नीति आम यात्रियों पर भारी आर्थिक बोझ डालेगी और सार्वजनिक परिवहन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करेगी। मंच के अध्यक्ष पीजी नजपाण्डे ने कहा कि सरकार प्रदेश के 26 जिलों में करीब 6000 से अधिक बसें चलाने की तैयारी में है, जिनका संचालन निजी ऑपरेटरों को सौंपा जाएगा। यह योजना अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है। उन्होंने कहा कि शहर की मौजूदा बस व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय किराया निर्धारण, रूट तय करने और संचालन अधिकार निजी हाथों में देना यात्रियों के हित में नहीं है।
-जरूरी है सरकारी निगरानी
मंच का कहना है कि निजी कंपनियों द्वारा किराया मनमाने तरीके से बढ़ाने, रूट चुनने में पक्षपात और सेवा गुणवत्ता पर असर की आशंका है। संगठन ने मांग की है कि किराया निर्धारण समिति बनाकर किराए को सरकार नियंत्रित करे तथा बस सेवा का संचालन सरकारी निगरानी में ही हो। जबलपुर में भी संगठनों ने चिंता जताई है कि शहर के प्रमुख मार्ग,विजयनगर, मदनमहल, राइट टाउन, अधारताल, भेड़ाघाट, ग्वारीघाट आदि पर नई जनबस सेवा निजी ऑपरेटरों को देने से किराया बढ़ेगा और आमजन प्रभावित होंगे। संगठनों ने नीति पर पुनर्विचार की मांग की है।
उपभोक्ताओं की मुख्य आपत्तियाँ
- निजी ऑपरेटरों के चलते किराया बढ़ने का खतरा
- रूट चुनने में पारदर्शिता की कमी
- सेवा गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका
- जनता के हितों से अधिक निजी लाभ प्राथमिकता
- उपभोक्ता संगठनों की मांग
- किराया निर्धारण समिति तुरंत बनाई जाए
- बस संचालन पर सरकारी निगरानी अनिवार्य
- मौजूदा बस व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
- नई नीति को लागू करने से पहले सार्वजनिक विमर्श हो
