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आयुष–फिजियो क्लीनिकों पर कसा शिकंजा, एनओसी के बिना पंजीयन नहीं


जबलपुर के क्लीनिकों में हड़कंप, जिले में 700 से ज्यादा क्लीनिक, आधे से अधिक के पास 
एनओसी नहीं

जबलपुर। जिले में संचालित होम्योपैथी, आयुर्वेद, योग–प्राकृतिक चिकित्सा तथा फिजियोथेरेपी जैसे आयुष विधाओं के निजी क्लीनिकों को अब पंजीयन के लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल (पीसीबी) से एनओसी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के बाद सभी जिलों को क्लीनिकों की जांच कर रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए गए हैं। शहर में लगभग 712 निजी क्लीनिक और करीब 400 आयुष क्लीनिक पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें से आधे से अधिक के पास पर्यावरण अनुमति नहीं है। कई क्लीनिक वर्षों से पैथोलॉजी, एक्स-रे, अल्ट्रासोनोग्राफी या अन्य मेडिकल वेस्ट उत्पन्न करने वाली सुविधाओं के साथ संचालित हो रहे हैं, लेकिन पर्यावरण मानकों का पालन नहीं कर रहे। यह नियम पहले अस्पतालों पर लागू था, अब क्लीनिकों के लिए भी अनिवार्य किया गया है, ताकि बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण में लापरवाही रोकी जा सके।

तारीख़ के बाद पंजीयन नहीं

जिला नोडल अधिकारी डॉ. आदर्श विश्नोई ने बताया कि सभी क्लीनिकों को 1 जनवरी से 28 फरवरी 2026 तक पॉल्यूशन एनओसी प्राप्त करना अनिवार्य होगा। जो क्लीनिक समय पर अनुमति नहीं लेंगे, उनका नया पंजीयन रोक दिया जाएगा और पुराने पंजीयन नवीनीकृत नहीं होंगे। विभाग क्लीनिकों का निरीक्षण कर यह भी देखेगा कि मेडिकल वेस्ट का निस्तारण पंजीकृत एजेंसी के माध्यम से किया जा रहा है या नहीं।

आयुष विधाओं वाली इकाइयों पर भी लागू नियम

जिन क्लीनिकों में आयुष विधाएं,आयुर्वेद, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा, योग,थेरेपी, पंचकर्म, फिजियोथेरेपी के उपचार दिए जाते हैं, वहां भी बायोमेडिकल वेस्ट और रसायनिक पदार्थों के उपयोग की संभावना रहती है। इस कारण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन्हें भी नियम में शामिल किया है। अब सभी क्लीनिकों को वर्ष में निर्धारित शुल्क जमा कर पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करना होगा।

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