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ई-अटेंडेंस एप से डेटा चोरी का आरोप, शिक्षकों की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त

 


राज्य सरकार से दो दिन में जवाब तलब, 1 दिसंबर को अगली सुनवाई

जबलपुर। मध्यप्रदेश में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस प्रणाली विवादों में घिर गई है। इस मामले में दायर याचिका पर   हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई, जिसमें याचिकाकर्ता शिक्षकों ने संशोधन आवेदन पेश किया। शिक्षकों का आरोप है कि ई-अटेंडेंस एप डाउनलोड करने के बाद डेटा चोरी और साइबर फ्रॉड की घटनाएँ सामने आई हैं। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि प्रदेश के 5 से 6 शिक्षकों के बैंक खातों से ऑनलाइन ठगी कर रकम निकाल ली गई, जिसका संबंध ऐप इंस्टॉल करने के बाद शुरू हुई गतिविधियों से बताया जा रहा है।

 आरोप,एप असुरक्षित, डीपीआई ने भी ली जानकारी

याचिकाकर्ता शिक्षकों ने हाईकोर्ट में कहा कि ई-अटेंडेंस एप न तो साइबर सुरक्षा मानकों पर खरा उतरता है और न ही किसी प्रमाणित सरकारी पोर्टल से लिंक है। कई शिक्षकों ने शिकायत की कि एप इंस्टॉल करने के बाद उनके मोबाइल में संदिग्ध लिंक, ओटीपी अनुरोध और अनधिकृत गतिविधियाँ दर्ज हुईं। शिक्षकों का कहना है कि ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी भी स्पष्ट नहीं है और इससे हजारों शिक्षकों का संवेदनशील डेटा खतरे में है। उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए डीपीआई (लोक शिक्षण संचालनालय) ने भी साइबर फ्रॉड की शिकायतों पर संज्ञान लिया है और संबंधित रिपोर्ट माँगी है। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक ऐप की सुरक्षा को लेकर ठोस जानकारी प्रस्तुत नहीं की गई।

शुरुआत से ही विरोध हो रहा

राज्य सरकार ने स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए ई-अटेंडेंस एप अनिवार्य किया था। लेकिन शुरुआत से ही शिक्षक संघों ने इसका विरोध किया, यह कहते हुए कि ऐप बार-बार क्रैश होता है, लोकेशन नहीं पकड़ता और शिक्षकों को अनावश्यक तकनीकी समस्याओं से जूझना पड़ता है। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार से दो दिन में जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 1 दिसंबर यानी सोमवार को तय की है। शिक्षकों की मांग है कि जब तक सुरक्षा प्रमाणित न हो, ई-अटेंडेंस एप को अस्थायी रूप से रोका जाए।

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