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मध्यप्रदेश के युवक ने दिल्ली में की आत्महत्या, कनपटी पर रिवाल्वर रखकर मारी गोली, बहन को अनुकम्पा नियुक्ति न मिलने से तनाव में था

 मुरैना (अंबाह)। एमपी के मुरैना में रहने वाले युवक लोकेन्द्र सक्सेना ने आज सुबह दिल्ली के जंतर-मंतर पर स्वयं को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। लोकेन्द्र को खून से लथपथ हालत में पड़े देख लोगों की भीड़ एकत्र हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल पहुंचाकर परिजनों को खबर दी। लोकेन्द्र सक्सेना बड़ी बहन को अनुकम्पा नौकरी न मिलने से परेशान रहा। 

                                     पुलिस के अनुसार अम्बाह मुरैना निवासी लोकेन्द्र सक्सेना के जीजा शिक्षा विभाग में पदस्थ रहे, जिसकी कुछ वक्त पहले ही मौत हो गई। इसके बाद लोकेंद्र अपनी बड़ी बहन की अनुकंपा नियुक्ति के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल रही थी।       रविवार दोपहर तक वह अंबाह के अपने घर में थे। शाम को दिल्ली के लिए रवाना हुए। आज सुबह जंतर-मंतर पर लोकेन्द्र ने स्वयं को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। दिल्ली पुलिस ने लोकेन्द्र द्वारा आत्महत्या किए जाने की खबर दी तो परिजन स्तब्ध रह गए। लोकेन्द्र के चाचा राजेंद्र सक्सेना का कहना था कि लोकेंद्र के पास कोई हथियार नहीं था इसलिए यह पता नहीं चल पा रहा है कि उनके पास गन कहां से आई। परिवार के सदस्य भतीजी के साथ दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं।

परिवार में दो भाई और दो बहनें-

लोकेंद्र के परिवार में दो भाई और दो बहनें हैं। लोकेंद्र सबसे बड़े थे। उन्होंने शादी नहीं की थी, बल्कि अपने छोटे भाई की शादी कराई थी। करीब सात साल पहले उनके पिता की कैंसर से मौत हो गई थी। उनकी मां भी लीवर की समस्या से पीडि़त हैं। घर की सारी जिम्मेदारी लोकेंद्र के कंधों पर थी।

दो माह पहले प्रधानमंत्री कार्यालय में दिया आवेदन

लोकेंद्र सक्सेना की बड़ी बहन रश्मि सक्सेना के पति आदित्य सक्सेना मुरैना जिले के पहाडग़ढ़ ब्लॉक के सरकारी सरसेनी स्कूल में शिक्षक थे। साल 2019 में इंदौर बहन के घर जाते समय रास्ते में उन्हें दिल का दौरा पड़ा जिससे उनकी मौत हो गई। आदित्य की मौत के बाद रश्मि सक्सेना ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए कई स्तरों पर आवेदन दिए। लोकेंद्र ने भी बहन की ओर से दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री कार्यालय में करीब दो महीने पहले आवेदन जमा किया। बताया गया कि गृह विभाग की ओर से 41 दिन में मामले का निराकरण करने का आश्वासन दिया गया थाए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।


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