याचिका पर हाईकोर्ट ने अपनाया सख्त रुख, केंद्र सहित राज्य सरकार को नोटिस
जबलपुर। मप्र की खराब सड़कें मौत का पर्याय बन चुकी हैं। हर साल मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है,लेकिन सरकारी गंभीरता दिखाई नहीं दे रही। इस आशय की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केन्द्र एवं राज्य सरकार से पूछा है कि सड़कांे के गड्ढों से मप्र में मौतों का आंकड़ा रोज बढ़ रहा है, इस स्थिति से बचने के लिए सरकारें क्या कर रही हैं। इंदौर के रहने वाले रिटायर्ड इंजीनियर राजेंद्र सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने एनएचएआई, एमपीआरडीसी व नगरीय प्रशासन विभाग को से भी चार सप्ताह में जबाव मांगा है। मामले पर अगली सुनवाई अब 15 दिसंबर को तय की गई है।
-देश में दूसरे नंबर पर है मप्र
याचिकाकर्ता के अनुसार, सड़क हादसों में होने वाली मौतों पर मध्यप्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। मप्र में 2023 में 5 हजार 8 सौ 40 हादसे हुए थे जिसमें की 2 हजार 1 सौ 61 मौतें हुईं। यह आंकड़े 2022 के मुकाबले 31ण्4 फीसदी ज्यादा हैं। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि ये मौतें कम हो सकती हैं, यदि प्रशासनिक तंत्र सड़कों के रखरखाव पर सही वक्त पर ध्यान दे।
