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केंद्रों की संख्या आधी, किसान कई गुने,मिलिंग घोटाले ने बिगाड़ा संतुलन

 


मिलिंग घोटाले की मार: समितियां फंसी, नए धान खरीदी केंद्र बनाने में संकट गहराया,55 केंद्रों की कमी,47 ही बन सके

जबलपुर। जिले में धान खरीदी से जुड़ा मिलिंग घोटाला अब खरीदी व्यवस्था पर सीधा असर डालने लगा है। मिलिंग में अनियमितताओं को लेकर 28 समितियों को एफआईआर के बाद पूरी प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया है। इसी कारण इस वर्ष खरीदी शुरू होने से पहले विभाग को 102 उपार्जन केंद्रों की जरूरत है, लेकिन अब तक केवल 47 केंद्र ही तय किए जा सके हैं। बचे हुए 55 केंद्रों के लिए अभी भी स्थान और संचालन इकाई तय नहीं हो पा रही है। कृषि उपज मंडी और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के अनुसार, घोटाले में शामिल समितियों को हटाने से खाली जगह को भरना बड़ी चुनौती बन गया है। जानकारी के मुताबिक, समितियों पर कार्रवाई के बाद नए केंद्रों के गठन में समस्या आ रही है। कोशिश है कि महिला स्व-सहायता समूहों को इस प्रक्रिया में जोड़ा जाए।

15 से अधिक केंद्र प्रभावित, स्कूल उपार्जन केंद्र बनेंगे सहारा

कई गांवों में समितियों के बाहर होने से खरीदी केंद्रों की संख्या कम पड़ रही है, जिससे किसान और विभाग दोनों परेशान हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित वे 15 केंद्र हैं जो मिलिंग घोटाले से सीधे जुड़े थे। अब प्रशासन स्कूलों और पंचायत भवनों को अस्थायी उपार्जन केंद्र के रूप में चुने जाने पर विचार कर रहा है। इससे खरीदी के दौरान किसानों की भीड़ को संभालना आसान होगा।

52 हजार किसान पंजीकृत, खरीदी प्रक्रिया पर बढ़ा दबाव

जिले में इस बार 52,000 किसानों ने पंजीयन कराया है। इतनी बड़ी संख्या में पंजीयन के कारण केंद्रों की कमी गंभीर समस्या बन गई है। विभाग को आशंका है कि केंद्रों की संख्या नहीं बढ़ी तो खरीदी के शुरुआती दिनों में भारी दबाव पड़ेगा। खाद्य विभाग के अनुसार, नई समितियों का गठन समय पर नहीं होने से प्रशासन अब महिला स्व-सहायता समूहों, अन्य सहकारी संस्थाओं और पंचायत स्तर की इकाइयों को आगे लाने की रणनीति बना रहा है।

प्रबंध करने में जुटे हैं

प्रभारी जिला आपूर्ति अधिकारी राजधर साकेत ने कहा कि स्थान तय होने के बाद अगले चरण में स्टाफ और बुनियादी सुविधाएं जुटाई जाएंगी। लक्ष्य है कि खरीदी शुरू होने से पहले सभी केंद्र पूरी तरह तैयार हों। अमला तेजी से प्रयास कर रहा है।


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