हाई कोर्ट में मऊगंज हिंसा मामले की सुनवाई टली, अब जनवरी के पहले सप्ताह में होगी

 


रीवा के पूर्व विधायक ने सीबीआई जांच की रखी मांग

जबलपुर। मऊगंज में आदिवासी परिवारों के साथ हुई हिंसा के मामले में बुधवार को मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। मुख्य न्यायाधीश संजेव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने समयाभाव के कारण सुनवाई आगे बढ़ा दी। अब यह मामला जनवरी के प्रथम सप्ताह में लिया जाएगा।यह जनहित याचिका रीवा जिले के हनुमना निवासी पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना की ओर से दायर की गई है। उनकी ओर से अधिवक्ता काजी फखरुद्दीन ने कोर्ट में पक्ष रखा। याचिकाकर्ता ने कहा कि मऊगंज के ग्राम गडरा में आदिवासी परिवारों की जमीन खाली कराने के लिए भू-माफियाओं ने हमला किया था। इस दौरान भारी हिंसा हुई, जिसमें ड्यूटी पर तैनात एक एएसआई की मौत भी हो गई थी। आरोप है कि उपद्रव के बाद माफियाओं ने कई आदिवासी लोगों की हत्या कर दी और एक ही परिवार के तीन सदस्य फांसी के फंदे पर लटके मिले। हिंसा में लगभग आधा दर्जन लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 200 आदिवासी परिवार घर छोड़कर लापता बताए जा रहे हैं। याचिकाकर्ता ने बताया कि इस संबंध में कई स्तरों पर शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए इस प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की गई है।मामले में राज्य के गृह विभाग के प्रमुख सचिव, डीजीपी, आईजी रीवा, कलेक्टर और एसपी मऊगंज, साथ ही केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और सीबीआई को पक्षकार बनाया गया है। कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई में सरकार से स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे और सभी अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया था।

-सुनवाई के मुख्य बिंदु 

  • हाई कोर्ट में सुनवाई अब जनवरी के पहले सप्ताह में होगी
  • पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना ने दायर की जनहित याचिका
  • मऊगंज हिंसा में कई आदिवासी परिवार हुए बेघर
  • याचिकाकर्ता ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की


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