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माता-पिता से मिलकर भावुक हुई नक्सली सुनीता, पिता ने मांगा पुनर्वास, आत्मसमर्पण नीति में मिलेगी पुलिस सेवा में नौकरी

 

बालाघाट। बालाघाट में हॉकफोर्स के सामने आत्मसमर्पण करने वाली नक्सली सुनीता की तीन साल बाद आज माता-पिता से मुलाकात हुई। इस दौरान सुनीता की आंखो से आंसू छलक पड़े। पुलिस अधिकारियों ने यह मुलाकात आयोजित की थी।                                                                                                                                  
                            सुनीता ने 1 नवंबर को आत्मसमर्पण किया था। आज  बालाघाट में पुलिस ने उसके माता-पिता से मुलाकात कराई। सरपंच चन्नुलाल पुरियाम के साथ बालाघाट पहुंचे माता-पिता ने बेटी से मिलने के बाद पुलिस का धन्यवाद किया। छत्तीसगढ़ी गोंडी भाषा को अनुवाद करते हुए सरपंच ने बताया कि माता-पिता चाहते हैं कि सुनीता उनके साथ रहे और उसका बीजापुर में ही पुनर्वास किया जाए। उन्होंने पुलिस को बेटी के सकुशल मिलने पर आभार व्यक्त किया। माता-पिता ने अनुवादक सरपंच के माध्यम से बताया कि नक्सलियों ने सुनीता को जबरदस्ती उनके घर से उठा लिया था। नक्सली संगठन ने धमकी दी थी कि यदि सुनीता को दलम में नहीं भेजा गया तो उनकी दो अन्य बेटियों को भी ले जाया जाएगा। सरपंच चन्नुलाल पुरियाम ने जानकारी दी कि गांव से कुल चार लोग नक्सली संगठन में शामिल हुए थे। सुनीता सहित दो लोग वापस आ गए हैं, जबकि दो अन्य का लौटना अभी बाकी है। सुनीता वर्तमान में बालाघाट में पुलिस की सुरक्षा में है। पुलिस उसे बेहतर माहौल देने का प्रयास कर रही है ताकि वह समाज की मुख्यधारा से जुड़कर एक सशक्त महिला के रूप में अपना जीवन जी सके। पिता दसरू ओयाम ने बताया कि सुनीता की पढ़ाई नहीं हुई थी और उसका आधार कार्ड भी नहीं है। पुलिस अब उसका आधार कार्ड बनवाएगी, इसके बाद कागजी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 

50 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दी गई-

आत्मसमर्पण नीति के तहत पुलिस विभाग की ओर से उसे शुरुआती तौर पर 50 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, उसे पुलिस सेवा में नौकरी, उस पर दर्ज कानूनी धाराओं में रियायत और अन्य सुविधाएं नीतिगत रूप से प्रदान की जाएंगी।


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