हाई कोर्ट ने कुछ दिन साथ रहकर देखने की व्यवस्था दी,अगली सुनवाई 12 नवंबर को
जबलपुर। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली युगलपीठ के समक्ष एक एक युवती ने कहा कि उसके पिता उसे पढ़ाई नहीं करने दे रहे थे और शादी का दबाव बना रहे थे। इसके लिए उसे प्रताड़ित किया जा रहा था। परेशान होकर वह घर से निकल गई और इंदौर में एक निजी कंपनी में नौकरी करके अपना खर्च निकालने लगी। वहीं सिविल सर्विस की तैयारी के लिए कोचिंग करने लगी। युवती ने पिता के साथ नहीं भेजने की गुहार लगाई। वहीं, पिता ने उसे फिर से प्रताड़ित नहीं करने का आश्वासन देकर घर भेजने का आग्रह किया। कोर्ट ने युवती को कहा कि वह चार-पांच दिनों तक अभिभावक के साथ रहकर देखे। अगर माहौल बेहतर लगे तो ठीक नहीं तो कलेक्टर को आदेश देंगे कि वह बाहर रहने और पढ़ाई की समुचित व्यवस्था कराएं। मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को होगी।
-हाईकोर्ट कैसे पहुँचा मामला
राजधानी भोपाल के बजरिया थाना क्षेत्र निवासी पिता ने यह बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। कहा गया कि उन्होंने बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन महीनों तक उसका कोई सुराग नहीं मिला। इस पर हाई कोर्ट की शरण ली गई। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को युवती का पता लगाने के निर्देश दिए। पुलिस ने इंदौर से उसे 10 महीने बाद बरामद किया, तब पता चला कि वह किराए पर रहते हुए एक निजी कंपनी में नौकरी कर रही है और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटी है। हाई कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने युवती पेश किया था। कोर्ट के पूछने पर युवती ने पिता के साथ जाने से इनकार कर दिया। उसने कोर्ट को बताया कि पिता उसे आगे नहीं पढ़ाना चाहते। जबकि वह सिविल सर्विसेज में जाने का सपना संजोए हुए मेहनत कर रही है।
