हाईकोर्ट सख्त, केंद्र व राज्य सरकार को नोटिस,दो हफ्ते में जवाब तलब
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के 500 मीटर दायरे में संचालित हो रही शराब दुकानों पर कड़ी नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश और केंद्र सरकार के सर्कुलर के बावजूद नियमों का उल्लंघन जारी रहने पर मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, मध्यप्रदेश के आबकारी आयुक्त और आबकारी सचिव को नोटिस जारी किया है। सभी संबंधित पक्षों को नोटिस भेजकर कठोर रुख का संकेत दिया है। मामला अब अगली सुनवाई में निर्णायक मोड़ ले सकता है। कोर्ट ने सभी से दो सप्ताह में जवाब मांगा है।
सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाया मुद्दा
यह जनहित याचिका भोपाल निवासी सामाजिक कार्यकर्ता राशिद नूर खान की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद प्रदेश में अनेक शराब दुकानें राजमार्ग से सटी हुई हैं। कई स्थानों पर तो लोग दुकान के सामने खड़े होकर खुलेआम शराब पीते दिखे, जो सीधे-सीधे कानून का उल्लंघन है। याचिका के साथ हाईकोर्ट में तस्वीरें और दस्तावेज भी पेश किए गए हैं, जिनसे दुकानों का राजमार्ग से ठीक बगल में होना प्रमाणित होता है।याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आर्यन उरमलिया ने कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि 500 मीटर के भीतर शराब दुकान न चले। दुकान सड़क से दिखनी भी नहीं चाहिए,और न ही उसकी सीधी पहुंच राजमार्ग से होनी चाहिए। केंद्र सरकार ने भी 1 जून 2017 को ऐसा ही सर्कुलर जारी किया था। इसके बावजूद मध्यप्रदेश की 2025-26 आबकारी नीति में कई दुकानों का नवीनीकरण राजमार्गों के पास ही कर दिया गया।
खतरा भी बढ़ा, दुर्घटनाओं में इजाफा
याचिका में कहा गया है कि राजमार्गों से सटी शराब दुकानों पर ट्रक चालक, वाहन सवार और राहगीर शराब पीकर वाहन चलाने लगते हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यह नागरिकों के जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) और नशा-निरोध दिशा-निर्देश (अनुच्छेद 47) का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश
राजमार्ग से 500 मीटर के भीतर शराब दुकान नहीं चलेगी
दुकान सड़क से दिखाई नहीं देनी चाहिए
शराब दुकान की सीधी पहुंच हाईवे से नहीं होनी चाहिए
राज्यों को अनिवार्य रूप से अनुपालन सुनिश्चित करना होगा
-हाईकोर्ट का कड़ा रुख
केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस
आबकारी सचिव, आबकारी आयुक्त से जवाब तलब
दो हफ्ते बाद अगली सुनवाई
राजमार्ग सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
