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समरसता का भाव ही भारत का मूल भाव है-कुलगुरु राजेन्द्र कुरारिया

 

जबलपुर। समरसता का जो भाव है वह सामूहिकता का भाव है और वही भारत का भाव हैए जिस तरह एक एक दीप जलाकर हम प्रकाश को बढ़ाते है। उसी तरह समरसता के भाव को भी एक दूसरे के साथ मिलकर आगे बढ़ाए। इसके लिए हमें समाज के बीच जाना होगा उन्हें समझाना होगा उन्हें बताना होगा हम भारतवासी है। उक्ताशय के विचार अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के कुलगुरु डॉ राजेंद्र कुरारिया ने समरसता सेवा संगठन द्वारा आयोजित महर्षि वाल्मीकी एवं महाराजा अजमीढ देव की जयंती के अवसर पर अग्रवाल धर्मशाला ग्वारीघाट में व्यक्त किए।                                                                                                                                     
                               सब सबको जाने सब सबको जाने के ध्येय वाक्य को लेकर समरसता सेवा संगठन द्वारा महर्षि वाल्मीकी एवं महाराजा अजमीढ देव की जयंती के अवसर पर डॉ राजेन्द्र कुररिया कुलगुरु के मुख्य आतिथ्य, एडवोकेट एमएम नेमा के विशिष्ट आतिथ्य, पंडित रोहित दुबे के आतिथ्य एवं समरसता सेवा संगठन अध्यक्ष श्री संदीप जैनए सचिव उज्जवल पचौरी की उपस्थिति में विचार गोष्ठी का आयोजन अग्रवाल धर्मशाला ग्वारीघाट में किया गया। विचार गोष्ठी के उपरांत नर्मदा उद्यान में अतिथियों के साथ सभी आगंतुक जनों ने मिलकर समी पत्र एवं आक का पौधा रोंपा और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर आगंतुक जनो को अपने अपने क्षेत्र में पौधों का वितरण भी किया गया। इस अवसर पर राजेश सोनकर, चमन दोहरे, विजय महरोलिया, सिद्धार्थ शुक्ला, रविन्द्रनाथ दुबे, जीडी अग्रवाल, राजेन्द्र सरीन, संजय गुप्ता, आनंद नेमा, काशीराम सोनी, रवि बोहत, सुजीत पटेल, दिनेश चमोली, नन्द कुमार रखेजा, कमलेश विश्वकर्मा, राकेश रूसिया, प्रीति शर्मा, शोभा सोनी, बीना जडिय़ा, स्नेहा सोनी, सरिता सोनी, सविता विश्वकर्मा के साथ बड़ी संख्या में समाज सेवी उपस्थित थे।


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