जबलपुर। माता रानी की प्रतिमाओं को विसर्जित करने के लिए तैयार किए गये विसर्जन कुंड अब रोजगार का जरिया भी बन सकेंगे। महापौर जगत बहादुर सिंह एवं निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार के बेजोड़ आइडिये ने ऐतिहासिक शुरुआत की भूमिका तैयार कर दी है। तय किया गया है कि विसर्जन कुंडों से निकलने वाली पूजन सामग्री से अगरबत्ती, धूपबत्ती के साथ आर्गेनिक खाद बनाई जाएगी।
निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने मंदिरों से पुष्प एवं पूजन सामग्री संग्रहण करने के लिए दो सीएनजी टिपर गाड़ियां लगातार संग्रहण कर रहीं हैं। विसर्जन कुंड में पुष्प एवं पूजन सामग्री की मात्रा अधिक होती है, जिसके लिए अब पुष्प एवं पूजन सामग्री संग्रहण, प्रशंस्करण एवं प्रबंधन केंद्र एवं संग्रहण हेतु लगाई गई टिपर वाहन की संख्या बढ़ाकर चार व टिपर वाहनों की संख्या 10 कर दी गयी है। टिपर वाहनों से विसर्जन के दौरान भटौली विसर्जन कुंड, गौरीघाट, तिलवारा घाट, हनुमानताल तालाब, अधारताल तालाब, मानेगांव तालाब, गोकलपुर तालाब से निकलने वाले पुष्प एवं पूजन सामग्री का भी संग्रहणकिया जा रहा है। शहर में स्थापित 4 पुष्प एवं पूजन सामग्री संग्रहण, प्रशंस्करण एवं प्रबंधन केंद्र में लाकर उनका प्रशंस्करण कर शहर की स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा अगरबत्ती, धूपबत्ती एवं आर्गेनिक खाद बनायीं जाएगी। खाद का इस्तेमाल नगर निगम द्वारा पेड़-पौधों के लिए किया जाएगा।
महापौर एवं नगर निगम के निगमायुक्त की इस पहल से विसर्जन कुंडों में विसर्जन के दौरान होने वाली अनेकानेक समस्याओं का समाधान होगा। पूजन सामग्री कुंड में ही सड़ेगी नहीं, जिससे बदबू का सामना नहीं करना पड़ेगा। दूसरे, सामग्री लगातार बाहर निकलते रहने से पानी गंदा नहीं होगा,जिससे विसर्जन की पवित्रता कायम रहेगी। इसके अलावा पूजन सामग्री के भरे रहने से कुंड छोटे पड़ जाते थे,ये समस्या भी अब नहीं रहेगी।

