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बिजली कंपनी लेगी कर्ज, भरेगी जनता !


ट्रांसको : चार हजार करोड़ का कर्ज लेने की तैयारी

जबलपुर।  मप्र पावर ट्रांसमिशन कंपनी मैनेजमेंट ने तय किया है कि वो चार हजार करोड़ का अतिरिक्त कर्ज लेगी, लेकिन इसके लिए शेयरधारको को राजी करना बड़ी चुनौती है। चिंता का विषय ये भी है कि इस लोन का बोझ अंतत: जनता की जेब पर ही पड़ेगा। हालाकि, कंपनी के आला अफसरों का मानना है कि ट्रांसको को अपनी बड़ी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए इस धनराशि की दरकार है और जब शेयर होल्डर्स को पूरी जानकारी दी जाएगी तो वे हामी भर देंगे। कंपनी ने तय किया है कि कर्ज लेने के लिए वो अपनी संपत्तियों को गिरवी रखेगी।

इतने कर्ज की दरकार क्यों

कंपनी के अनुसार, मप्र पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में जुटी है। अंडरग्राउंड केबल बिछाई जा रही है।  मेंटेनेंस में ड्रोन और एआई तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।  बिजली सप्लाई को सुधारने, अघोषित बिजली कटौती कम करने और मेंटेनेंस के लिए बिजली कंपनी नई तकनीक का उपयोग कर रही है। हाई वोल्टेज लाइनों की पेट्रोलिंग तक ड्रोन तकनीक से की जा रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल करने से ट्रिपिंग और ब्रेकडाउन में भी कमी आई है। इन सब प्राजेक्ट्स को अंजाम तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त धनराशि की जरूरत है।

अभी कितना कर्ज ले रखा है

कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट 2023-24  के अनुसार 30 जून 2024 तक उस पर 13 हजार 3 सौ 11.70 करोड़ रुपए का ऋण है, जिसमें लिए गए ऋण, बकाया ब्याज और अप्रयुक्त स्वीकृत ऋण शामिल हैं। आने वाले पांच साल (वित्तीय वर्ष 2024-25 से 2028-29) में कंपनी को लगभग 4 हजार करोड़ के अतिरिक्त ऋण की जरूरत होगी।  कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यदि अतिरिक्त 4 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया जाता है, तो कुल उधारी 17 हजार 4 सौ 11.70 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी।  कंपनी विशेष प्रस्ताव लाकर शेयरधारकों की सहमति लेने की योजना पर काम कर रही है।

किस पर कैसे बढ़ेगा लोन का बोझ

जानकारों की मानें तो कंपनी ने कर्ज लिया है तो चुकाना भी पड़ेगा और कंपनी जब सारे काम जनहित में ही कर रही है तो स्पष्ट है कि जनता से ही इसकी वसूली भी की जाएगी। हालाकि, प्रत्यक्ष तौर पर देखें तो पब्लिक से ट्रांसको का सीधा संबंध नहीं है,लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से इस कर्ज की अदायगी भी पब्लिक की जेब से ही होगी। ट्रांसको इस कर्ज को चुकाने के लिए अन्य कंपनियों पर भार बढ़ाएगी और वे कंपनियां पब्लिक का लोड बढ़ा देंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि सच्चाई यही है कि इस कर्ज का बोझ पब्लिक पर ही पड़ेगा,लेकिन अच्छा हो कि जिन परियोजनाओं का नाम लेकर लोन लिया जा रहा है,उन्हें तय समय-सीमा पर पूरा कर लिया जाए।

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