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प्रमोशन में आरक्षणः कोर्ट ने सरकार से पूछा, आरक्षित वर्ग का वर्तमान प्रतिनिधित्व कितना है



सरकार ने कर्मचारियों के आंकड़े सीलबंद लिफाफे में किए पेश,हाईकोर्ट ने प्रमोशन पॉलिसी पर मांगा स्पष्टीकरण,अगली सुनवाई 12 नवंबर को 

जबलपुर।  मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में आज एक बार पुनः प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सुनवाईए जिसमें राज्य सरकार ने क्वांटफायबल डेटा पेश किया। इसके साथ ही सीलबंद लिफाफे में कर्मचारियों के आंकड़े भी पेश किए गएए जिसमें हाईकोर्ट ने जवाब में असंतोष जताया। मामले पर अगली सुनवाई 12 नवंबर को तय की गई है।

-जवाब पर कोर्ट ने जताया असंतोष

सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए और महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट में उपस्थित होकर सरकार का पक्ष रखा। इस दौरान सरकार ने सील बंद लिफाफे में विभाग भर ऑडिट रिपोर्ट पेश की। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि कुछ विभागों में पहले ही आरक्षित वर्ग के कर्मचारी ज्यादा है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के द्वारा पेश किए गए जवाब पर असंतोष जताते हुए प्रमोशन पॉलिसी और आंकड़ों पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। चीफ जस्टिस की बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह सभी विभागों का एकीकृत चार्ट तैयार कर कोर्ट में पेश करें। इसमें दर्शाया जाए कि प्रत्येक विभाग में आरक्षित वर्ग का वर्तमान प्रतिनिधित्व कितना है, साथ ही कहा गया कि यह कार्य केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं बल्कि सही नियमों पर आधारित गणना होनी चाहिए। 

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