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जबलपुर की सड़कों पर अगले साल से पहले नहीं दौड़ सकेंगी ई-बसें

   


अगस्त में मिल जानी थी 33 बसों की पहली खेप,अब तक नहीं मिली,चार्जिंग स्टेशन का काम भी बेहद सुस्त,लाइन बिछाने का प्रोजेक्ट शुरु भी नहीं हुआ,ट्रैफिक और पॉल्युशन से राहत अभी दूर

जबलपुर।  जबलपुर को ई-बसों की पहली खेप की 33 ई-बसें अगस्त में ही मिल जानी थी, लेकिन, अब तक एक भी बस नहीं मिली है। बहुत संभव है कि इन बसों का आगमन अगले साली जनवरी में ही संभव हो। हालाकि, नगर निगम प्रशासन और जेसीटीसीएल की ओर से इलेक्ट्रिक बसों को शीघ्र लाने के प्रयास भी नहीं किये जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री ई-बस सेवा की सौ बसें जबलपुर को देना तय किया था। तीन खेपों में मिलने वाली बसों का एक साल बाद भी श्रीगणेश न होना निराशाजनक है।

-ट्रैफिक और पॉल्युशन, दोनों पर कंट्रोल

ई-बसों से दो अहम फायदे होंगे। पहला, ट्रैफिक को नियंत्रित किया जा सकेगा,क्योंकि लोग इन बसों से आवागमन करेंगे। दूसरा, इलैक्ट्रिक कैटेगरी की होने के कारण ये बसें हवा को नुकसान नहीं पहुंचाएंगी। ये अत्याधुनिक बस एक बार चार्ज होने पर 180 किमी दौड़ेगी।  शहर के प्रमुख मार्गों के अलावा इलेक्ट्रिक बसों का संचालन पनागर, भेड़ाघाट, शहपुरा, पाटन और बरेला तक किया जाएगा। इसका किराया 2 रुपए प्रति किलोमीटर तक तय किये जाने की संभावना है। उम्मीद जताई जा रही है कि इलेक्ट्रिक बसों के आने से पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम सहज और सुलभ और सस्ता हो जाएगा।

-प्रयास, जो नहीं किए जा रहे

इधर, विशेषज्ञों का कहना है कि इन बसों को जल्दी जबलपुर की सड़कों तक लाने के लिए कोशिशें की जा रहीं है,वे महज कागजी ही हैं। ना तो ठोस पत्राचार किया जा रहा है और ना ही किसी को वस्तुस्थिति का सटीक ज्ञान है। जो जवाब भोपाल और दिल्ली में बैठे अधिकारी दे देते हैं, उसे ही माना जा रहा है। केन्द्र सरकार के प्रतिनिधियों से पत्र व्यवहार के साथ ही बातचीत भी करनी होगी।

-इन्हें मिल गया है बहाना

ई-बसों के आगमन में देरी जहां एक ओर जबलपुर की जनता को मायूस करने वाला है वहीं उस अमले के लिए ये अच्छी खबर है,जो इन बसों के संचालन की तैयारियों में हद दर्जे की सुस्ती से काम ले रहे हैं। अभी तक कठौंदा और आईएसबीटी में चार्जिंग स्टेशन का काम अधूरा है। चार्जिंग स्टेशन तक 33 केवी लाइन बिछाने का काम शुरु तक नहीं हुआ है। बिना इन कामों के पूर्ण हुए बसों का संचालन नामुम्किन है। इन कामों में छ: से आठ महीनों का वक्त लग सकता है। यानी बसों के आने की गति से ज्यादा धीमीअमले की रफ्तार है।

-वर्जन

बसें मिलने से पहले तैयारियां कर लेंगे

हां, ये सही है कि हमारी तैयारियां अभी पूरी नहीं हुई हैं,लेकिन ये तय है कि ई-बसों के आने से पहले ही हम सारे इंतजाम पूर्ण कर लेंगे। अगस्त में जबलपुर को एक खेप मिलनी थी,लेकिन वो पांच महीने के लिए टल गयी है। हमारे प्रयास तेजी से जारी हैं।

 सचिन विश्वकर्मा, सीईओ, जेसीटीसीएल

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