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अडाणी ग्रुप ने मप्र के लिए मांगा ट्रांसमिशन नेटवर्क की परमिशन

 


सिंगरौली के 1230 मेगावॉट के थर्मल पॉवर प्लांट की बिजली के पारेषण से जुड़ी है याचिका, 11 तक दिए जा सकेंगे सुझाव व आपत्ति,विंध्य और महाकोशल को होगा ज्यादा फायदा

जबलपुर। देश के ख्यात बिजनेस समूह अडाणी ग्रुप ने सिंगरौली के 1230 मेगावॉट वाले थर्मल पॉवर प्लांट में पैदा होने वाली बिजली के पारेषण(ट्रांसमिशन) लाइसेंस के लिए  विद्युत नियामक आयोग के समक्ष याचिका दाखिल की है। आयोग ने इस आवेदन पर आम जनता, हितधारकों और संबंधित पक्षों से 11 अगस्त तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसके बाद 20 अगस्त को जनसुनवाई होगी। इसमें याचिका पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। अनुमान है कि यदि सब कुछ ठीक रहा तो इस साल के अंत तक ट्रांसमिशन नेटवर्क पर काम शुरु हो जाएगा।

-प्रोजेक्ट पर एक नजर

अडाणी समूह सहयोगी कंपनी महान ट्रांसमिशन लिमिटेड ने राज्य में ट्रांसमिशन लाइसेंस के लिए मप्र विद्युत नियामक आयोग में याचिका दाखिल की है। कंपनी ने टैरिफ याचिका के जरिए लाइसेंस मांगा है।   महान ट्रांसमिशन लिमिटेड का अधिग्रहण इस साल की शुरुआत में अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने किया है। यह परियोजना सिंगरौली के बंधौरा में स्थित महान एनर्जेन लिमिटेड के थर्मल पावर प्लांट से जुड़ी है। यहां से उत्पादित बिजली का पारेषण(ट्रांसमिशन) किया जाना प्रस्तावित है। परियोजना के तहत मध्यप्रदेश को आवंटित 12 सौ 30 मेगावॉट बिजली की निकासी के लिए नया ट्रांसमिशन नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इस नेटवर्क से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बिजली पहुंचाई जाएगी। अभी तक मप्र में बिजली ट्रांसमिशन के लिए पांच कंपनियों को लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं।

-लाइन लॉस घटेगा, आपूर्ति बढ़ेगी

इस प्लांट से मध्यप्रदेश के विंध्य एवं महाकोशल क्षेत्र का ज्यादा फायदे होने की बात की जा रही है। कहा जा रहा है कि इस प्लांट से मप्र के एक बड़े क्षेत्र तक बिजली पहुंचाना आसान हो जाएगा,जिससे लाइन लॉस घटेगा और बिजली की आपूर्ति को भी ज्यादा सुनिश्चित किया जा सकेगा। अभी तक देश के दूसरे पॉवर प्लांटों से बिजली लाने में जो खर्च होता है,उसमें भी कमी आने की उम्मीद है। हालाकि, अभी अडाणी गु्रप की डगर इतनी आसान नहीं है,जितनी दिखाई दे रही है।

-टैरिफ निर्धारण पर सबकी नजर

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कंपनी को इस लाइसेंस की स्वीकृति मिल जाती है तो मप्र के ट्रांसमिशन सेक्टर में अडाणी समूह की उपस्थिति और अधिक मजबूत होगी। हालांकि कुछ ऊर्जा विश्लेषकों और उपभोक्ता मंचों ने इस पर पारदर्शिता और टैरिफ निर्धारण की प्रक्रिया को लेकर सतर्कता बरतने की मांग की है। अब सबकी निगाहें 20 अगस्त को होने वाली जनसुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि महान ट्रांसमिशन को राज्य में पारेषण लाइसेंस मिलेगा या नहीं।

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