रादुविवि:प्लान भी था और फंड भी, फिर भी फॉर्मेसी की मास्टर डिग्री शुरु न होना गंभीर, मध्यम वर्ग के छात्रों के सपने चकनाचूर
जबलपुर। पुख्ता प्लान और पर्याप्त फंड होने के बावजूद रादुविवि प्रबंधन द्वारा फॉर्मेसी की मास्टर डिग्री की पढ़ाई शुरु न करना कई सारे गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सरकारी इंतजामों के लचर हो जाने का पूरा फायदा निजी कॉलेज उठा रहे हैं। खासकर मध्यम वर्ग के छात्रों की मुसीबत ज्यादा है,क्योंकि निजी कॉलेज मोटी फीस वसूल रहे हैं। विवि ने कागजों में सब कुछ तैयार कर लिया है,लेकिन इसे जमीन पर क्यों नहीं उतारा जा सका,इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
-जो हो न सका
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में इसी सत्र से एम फार्मेसी की पढ़ाई शुरू होनी थी, मगर विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही के कारण यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। नतीजा यह है कि छात्रों को मजबूरी में या तो शहर से बाहर जाने विवश होना पड़ेगा या फिर निजी कॉलेजों में ऊंची फीस पर पढ़ाई करनी होगी। डॉयरेक्ट्रेट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन द्वारा 13 सितंबर से काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू कराई गयी है।
- कागजों में तैयार है पूरा प्लान
फार्मेसी विभाग के उन्नयन के लिए रादुविवि में 11 करोड़ की लागत से नया आधुनिक भवन बनना था। इसमें 6 क्लासरूम, 8 प्रयोगशालाएं, लाइब्रेरी, पार्किंग आदि का निर्माण किया जाना था। पुराने भवन के सामने इसका निर्माण होना था। फार्माकोग्नोसी, फार्मोकोलॉजी, फार्मास्यूटिकल केमेस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, असेप्टिक रूम और मशीन रूम आदि का निर्माण प्रस्तावित था। विश्वविद्यालय प्रशासन की कमजोर इच्छाशक्ति ने छात्रों के सपनों पर ब्रेक लगा दिया।
-कहां तक पहुंची च्वाइस फिलिंग
च्वाइस फिलिंग की प्रक्रिया जारी है, जो 7 अक्टूबर तक जारी रहेगी। दूसरे चरण की मेरिट लिस्ट 8 अक्टूबर को जारी होगी। 11 अक्टूबर को आवंटन जारी होने के बाद विद्यार्थी 16 अक्टूबर तक कालेज पहुंचकर प्रवेश ले पाएंगे। दोनों राउंड में रिक्त रहने वाली सीटों पर प्रवेश देने तीन कॉलेज लेवल काउंसलिंग होगी। विवि की इस लापरवाही के कारण निजी कॉलेजों को सीधे फायदा होगा, क्योंकि जिले में पॉलीटेक्निक कॉलेज में भी फार्मेसी का कोर्स उपलब्ध है लेकिन मास्टर डिग्री न होने के कारण छात्र-छात्राओ को आगे की शिक्षा के लिए परेशान होना पड़ता है।
