मौसम विशेषज्ञों की माने तो पश्चिमी हिस्से में एक लो प्रेशर एरिया सक्रिय है। वहीं एक ट्रफ भी गुजर रही है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस का 3 व 4 अक्टूबर से ज्यादा असर देखने को मिल सकता है। जिसके चलते भारी बारिश का दौर रहेगा। गौरतलब है कि प्रदेश के 12 जिलों से मानसून विदा हो चुका है। इनमें ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, आगर-मालवा, नीमच, मंदसौर व रतलाम भी शामिल हैं। राजगढ़ व अशोकनगर के कुछ हिस्से से मानसून विदा हुआ है। मौसम विभाग की माने तो मानसून की वापसी के लिए अभी परिस्थिति अनुकूल नहीं है, लेकिन 10 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से मानसून विदाई ले लेगा। इस वर्ष मानसून ने मध्यप्रदेश में 16 जून को दस्तक दी थी। समय से एक दिन बाद मानसून प्रदेश में एंटर हुआ था। मौसम विभाग के अनुसार 6 अक्टूबर तक प्रदेश के सभी जिलों से मानसून विदा हो जाता है, लेकिन नया सिस्टम बनने से विदाई की तारीख आगे भी बढ़ सकती है।
गुना में सर्वाधिक बारिश-
इस बार गुना में सबसे ज्यादा 65.6 इंच बारिश दर्ज हुई। मंडला-रायसेन में 62 इंच से अधिक व श्योपुर-अशोकनगर में 56 इंच से ज्यादा बारिश हो चुकी है। वहीं शाजापुर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी व धार सबसे कम बारिश वाले टॉप-5 जिलों में शामिल हैं। शाजापुर में 28.9 इंच, खरगोन में 29.6 इंच, खंडवा में 32 इंच, बड़वानी में 33.5 इंच व धार में 33.6 इंच पानी गिरा है।