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रिटायर्ड अफसर दो महीने रहे डिजिटल अरेस्ट, ठगों ने CBI अधिकारी बनकर डराया, 68.30 लाख रुपए कराए ट्रांसफर

 

भोपाल। एमपी के भोपाल में भेल के रिटायर्ड सुपरवाइजर को साइबर ठगों ने दो महीने तक डिजिटल अरेस्ट रखा। आरोपियों ने खुद को टेलिकॉम और सीबीआई अधिकारी बताया। इसके बाद 71 वर्षीय बुजुर्ग को मानव तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की धमकी दी। दो महीने में 68.30 लाख रुपए 9 बैंक खातों में ट्रांसफर कराए।

                                  अयोध्या नगर क्षेत्र निवासी पीडि़त विनोद कुमार गुप्ता उम्र 71 वर्ष ने भोपाल क्राइम ब्रांच में इसकी शिकायत दर्ज कराई। जिसके बाद क्राइम ब्रांच मामले की जांच में जुटी है। पुलिस अब उन बैंक खातों की डिटेल खंगाल रही है जिनमें रकम ट्रांसफर हुई। आरोपियों ने 4 जुलाई से 4 सितंबर 2025 तक विनोद गुप्ता को डिजिटल अरेस्ट में रखा। इस दौरान हर गतिविधि की अनुमति उन्हें ऑनलाइन देनी पड़ती थी चाहे पूजा करनी हो या भोजन करना। आरोपी अनुमति देते समय मैसेज में डीएम-592 कोड लिखते और अंत में जय हिंद लिखना अनिवार्य करते थे।

सिम के अपराधों में इस्तेमाल का कहकर डराया-

पीडि़त ने शिकायत में बताया कि उन्हें आरोपियों ने कॉल कर बताया कि उनके नाम से दिल्ली के चांदनी चौक में एक सिम कार्ड रजिस्टर्ड हैं। जिसका इस्तेमाल अपराधों में हो रहा है। इसके अलावा उनकी आईसीआईसीआई बैंक पासबुक से 68 करोड़ रुपए के काले धन और ड्रग-मानव तस्करी के मामले जुडऩे की बात कहकर भी धमकाया गया।

रिश्तेदारों से उधार लेकर पैसे किए ट्रांसफर-

ठगों ने अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कराई। इनमें सीएसबी बैंक, करुर व्यास बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, कोटक बैंक, बंधन बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक के दो खाते शामिल हैं। विनोद गुप्ता ने रिश्तेदारों से उधार लेकर भी पैसा भेजा।


सरकारी दस्तावेज दिखाकर बनाया भरोसा-

पूरे प्रकरण के दौरान आरोपियों ने अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के फर्जी दस्तावेज और नोटिस दिखाकर रिटायर्ड सुपरवाइजर को मानसिक रूप से भयभीत कर दिया। धोखे का शिकार हुए विनोद गुप्ता अब पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


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