सीएम की सुरक्षा में जब चूक का मामला सामने आया तो यह हकीकत सामने आई। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉण् मोहन यादव गांधीसागर रिट्रीट फेस्टिवल के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे थे। शनिवार सुबह कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री हॉट एयर बैलून में सवार हुए। उड़ान भरने से पहले ही अचानक तेज हवा चलने लगी, जिससे बैलून खतरनाक तरीके से झूलने लगा। बैलून में गर्म हवा भरने वाले बर्नर की आग बैलून के कोने में लगे कपड़े तक पहुंच गई। सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल बैलून को संभालते हुए सीएम को बमुश्किल बास्केट (गोंडोला) से नीचे उतारा। इस घटनाक्रम के बाद मंदसौर कलेक्टर अदिति गर्ग ने कहा कि मौके पर हादसे जैसा कुछ नहीं था। बैलून में सुरक्षा के संबंध में किसी प्रकार की कोई चूक नहीं हुई है। सीएम केवल एयर बैलून को देखने के लिए गए थे।
फेस्टिवल पर एक दिन में 50 राइड होती है-
अप्रैल-23 में शुरुआत होने के बाद से हर साल फेस्टिवल होता है। वहीं साल में चार से छह महीने तक पर्यटकों की भीड़ रहती है। ऐसे में उन्हें हवा से जुड़ी एक्टिविटी भी कराई जाती है। फेस्टिवल के दौरान हॉट एयर बैलून में एक दिन में एवरेज 50 तक राइड होती है।
हॉट एयर बैलून के लिए भी पायलट लाइसेंस जरूरी-
भारत में हॉट एयर बैलून उड़ाने के लिए नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से एयर ऑपरेटर परमिट लेना जरूरी है। डीजीसीए बैलून की मेकिंग क्वालिटी, बर्नर, बॉस्केट सहित सभी की जांच के बाद लाइसेंस जारी करती है। बैलून उड़ाने वाले पायलट को भी डीजीसीए से बैलून पायलट लाइसेंस लेना जरूरी है। बैलून उड़ाने के लिए प्रोपेन गैस का इस्तेमाल होता है। लीकेज से लपटें फैल सकती हैं। बैलून उड़ाने का सही समय सुबह या शाम होता है, जब हवा शांत रहती है। हवा तेज हो तो बैलून का कपड़ा (एनवेलप) झुक जाता है] बर्नर की लपटें कपड़े को छू सकती है। बैलून में पहले ठंडी हवा और फिर गर्म हवा डाली जाती है। इस दौरान अगर कपड़े का हिस्सा नीचे गिर जाए और बर्नर का फ्लेम उसके पास आ जाए तो आग लग सकती है।
कंपनी यूपी में 2020 में ब्लैकलिस्ट, 2021 में बहाल
पर्यटन विभाग ने आयोजन की जिम्मेदारी गुजरात की लल्लूजी एंड संस कंपनी को दी है। 10 साल का एग्रीमेंट हुआ है। विभाग के अनुसार इसी कंपनी ने 2019 में प्रयागराज अर्धकुंभ में टेंट सिटी लगाई थी। बाद में मेला प्राधिकरण व कंपनी के बीच विवाद हुआ। विवाद के कारण प्राधिकरण ने 2020 में कंपनी को 5 साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया था। कंपनी ने इसके खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाया। 2021 में प्राधिकरण व कंपनी के बीच आउट-ऑफ-कोर्ट समझौता हुआ और ब्लैक लिस्टिंग का आदेश वापस ले लिया। विवाद 107 करोड़ के फर्जी बिलों के भुगतान का था।