कोटा. पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मे रेलवे नियमों का उल्लंघन करना एक स्टेशन मास्टर को काफी महंगा पड़ गया। एक स्टेशन मास्टर को बिना टिकट और टीटीई से बिना पूछे ट्रेन के एसी कोच में चढऩे पर 2000 का जुर्माना भरना पड़ा। इस घटना से स्टेशन मास्टर व टिकट चैकिंग स्टाफ में गरमा-गरमी बढ़ गई है.
यह घटना सवाई माधोपुर स्टेशन पर मंगलवार 16 सितम्बर को घटित हुई, जहां यह स्टेशन मास्टर नई दिल्ली-इंदौर इंटरसिटी ट्रेन (12416) में सवार हुआ था। वह सीधे तृतीय श्रेणी के वातानुकूलित कोच में जाकर बैठ गया। जब टीटीई ने उनसे टिकट या पास के बारे में पूछा, तो स्टेशन मास्टर ने बताया कि वह विक्रमगढ़ आलोट में ड्यूटी पर जा रहे हैं, और उनके पास कोई टिकट या पास नहीं है। टीटीई ने उन्हें स्लीपर कोच में जाने के लिए कहा, लेकिन स्टेशन मास्टर एसी कोच में ही बैठने पर अड़े रहे। इस बात को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस हो गई।
कोटा स्टेशन पर उतारा गया
टीटीई ने तुरंत इस मामले की शिकायत कोटा कंट्रोल रूम और वरिष्ठ अधिकारियों को दी। जब ट्रेन कोटा स्टेशन पहुँची, तो टीटीई ने आरपीएफ (रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स) को एक मेमो सौंप दिया। मेमो मिलने के बाद आरपीएफ ने स्टेशन मास्टर को ट्रेन से उतार लिया। स्टेशन मास्टर को रेलवे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन इससे पहले ही उन्होंने टीटीई द्वारा निर्धारित 2000 का जुर्माना भर दिया। जुर्माना भरने के बाद आरपीएफ ने उन्हें छोड़ दिया।
रेलवे के ही दो विभाग आमने-सामने
बताया जाता है कि स्टेशन मास्टर व उनके साथियों का कहना था कि हमेशा ही वे ड्यूटी पर इसी तरह एसी कोच में बैठकर जाते व वापस लौटते हैं, लेकिन मंडल में यह पहला मामला है, जब किसी टीटीई ने अपने ही वरिष्ठ रेलकर्मी के साथ इस तरह का व्यवहार किया है. उनका यह भी मानना है कि नियमों के हिसाब से टीटीई सही हो सकते हैं, किंतु व्यवहारिक में इस तरह का बर्ताव पूरी तरह से अनुचित है.
