जबलपुर। हैदराबाद के रेस क्लब से रैपुरा के ठाकुर फार्म हाउस में भेजे गए 57 घोड़ों में से 19 की मौत के मामले में पुलिस ने पशु प्रजनन कार्यक्रम अधिकारी की रिपोर्ट पर सोमवार को हैदाराबाद की कंपनी और परिवहनकर्ता के खिलाफ पनागर थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने बताया कि घोड़ों को सड़क परिवहन के माध्यम से जबलपुर लाया गया था। परिवहन में किसी प्रकार की सूचना जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग को नहीं दी गई थी और इन घोड़ों को ग्राम रैपुरा में स्थापित करने के लिए ग्राम पंचायत रैपुरा से अनुमति ली गई थी। इससे अश्व बीमार हो गए और इनमें से 19 की मृत्यु हो गई थी। पुलिस ने छानबीन में पाया कि आरोपियों पर पशुओं का क्रूरतापूर्वक परिवहन, क्रूरतापूर्ण बंद और अपर्याप्त आश्रय दिया था, जिससे आरोपियों पर क्रूरता के अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया।
तबेले में बांध दिए गए थे घोड़े : प्रजनन कार्यक्रम अधिकारी डॉ हेमलता जैन ने मौके पर मुआयना करके घोड़ों का इलाज भी किया गया था, जहां इन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताय है कि घोड़ों को अस्तबल की जगह गाय-भैंस के तबेले में बांध दिया गया था।
परिवहन तनाव, वातावरण बदलाव बना था कारण : परिवहकर्ता पटेल नगर, महाराजपुर निवासी सचिन तिवारी ने अपने बयान में बताया था कि घोड़ों की मौत परिवहन तनाव, वातावरण बदलाव और गर्मी के तनाव से हुई है। अश्वों के रहने की व्यवस्था उचित नहीं थी। कैटल शेड में इन्हें रख दिया गया था।
