भोपाल। मध्यप्रदेश में विधायकों की पगार बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव के मुताबिक बढ़ी पगार में विधायकों को करीब डेढ़ लाख रूपए से अधिक सैलरी मिल सकेगी। यह प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री मोहन यादव सहित विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भेजा है। तीन सदस्यीय समिति के अध्यक्ष वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा हैं। समिति में बीजेपी और कांग्रेस के एक-एक सीनियर विधायक शामिल हैं, जो इसकां फैसला कर सकेंगे। प्रस्ताव के अनुसार अगर सैलरी में 45 फीसदी का इजाफा होता है, तो एमपी के माननीयों की सैलरी डेढ़ लाख के पार हो जाएगी।
50 हजार रुपए वेतन-भत्ता बढ़ाने का प्रस्ताव
मध्य प्रदेश विधानसभा सूत्र बताते हैं कि अगर विधायकों की वर्तमान सैलरी की बात करें तो मूल सैलरी 30 हजार, निर्वाचन भत्ता 35 हजार, चिकित्सा भत्ता 10 हजार, अर्दली भत्ता 10, टेलीफोन खर्च 10 हजार, किताब, पत्रिका और अन्य सामग्री खरीद के लिए 15 हजार रुपए मिलते हैं। कुल मिलाकर विधायकों को 1 लाख 10 हजार रुपए मिलते हैं। वर्तमान में 50 हजार रुपए बढ़ाने की मांग की गई है, इससे मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष की सहमति से अगर ये प्रस्ताव पास हो जाता है तो मध्य प्रदेश के विधायकों की सैलरी 1.60 लाख हो जाएगी। गौरतलब है कि 2016 में यह पगार बढ़ाई गई थी।
एक करोड़ का अतिरिक्त भार
विधायकों की सैलरी बढ़ने से पहले से कर्ज डूबी मध्य प्रदेश सरकार पर अतिरिक्त भार बढ़ जाएगा। प्रदेश में 230 विधायकों में से 31 मंत्री हैं। मुख्यमंत्री को 2 लाख रुपए तो कैबिनेट मंत्रियों को 1.70 लाख और राज्य मंत्रियों को 1.45 लाख रुपए मिलते हैं। शेष 199 विधायकों का वेतन भुगतान विधानसभा से होता है। इनमें विधानसभा अध्यक्ष का 1 लाख 87 हजार रुपए वेतन शामिल है। इस पर 2 करोड़ 19 लाख 67 हजार रुपए का खर्च आता है। प्रस्तावित 50 हजार रुपए की बढ़ोतरी के बाद सरकार के खजाने पर करीब एक करोड़े का अतिरिक्त भार आएगा।
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