जबलपुर। मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में सेटिंग से मलाईदार गद्दी पाने वाले सभी प्रभार आदेशों को सरकार ने तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय के इस आदेश से नगर निगम, नगर पालिका और स्मार्ट सिटी कार्यालयों में हड़कंप मचा हुआ है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त कैलाश वानखेड़े ने अपने आदेश में कहा है कि बिना पात्रता, गैर पोषक संवर्ग और अधिकार विहीन तरीके से दिए गए प्रभार वित्तीय अनियमितता और कदाचार के दायरे में आएंगे। ऐसे प्रकरण में संबंधित अफसरों की व्यक्तिगत जवागदेही तय कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकेगी।
वर्षों से चल रहा था प्रभार का खेल
प्रदेश के मुख्य नगर पालिका अधिकारी, अधीक्षण यंत्री, मुख्य वित्त अधिकारी, उपायुक्त और अमृत योजना जैसे पदों पर नियमों को ताक पर रखकर प्रभारी नियुक्तियां कराई गई थीं, जिनमें करोड़ों रूपए के निर्माण कार्य, निविदाएं, भुगतान और प्रशासनिक निर्णय नियंत्रित किए जाते हैं। शासन के इस आदेश के बाद कइ्र प्रभार आदेश स्वतः शून्य माने जा रहे हैं। इनमें शहर के कई अधिकारी-कर्मचारियों के प्रभारी आदेश कठघरे में आ गए हैं। बताया जा रहा है कि अब भोपाल मुख्यालय से ही प्रभार तय हो सकेंगे। आदेश के बाद अपात्र अधिकारी-कर्मचारियों से कराया गया कार्य अमान्य हो सकता है।
ये हैं अफसर-कर्मचारी
नाम- मूल पद- दिया गया प्रभार
अशफाक कुरैशी - अपर आयुक्त वित्त - मुख्य वित्त अधिकारी स्मार्ट सिटी
कमलेश श्रीवास्तव - कार्यपालन यंत्री - अधीक्षण यंत्री नगर निगम
संभव अयाची - सहायक आयुक्त नगर निगम - उपायुक्त नगर निगम
अंकुर नाग - उपयंत्री विद्युत - सहायक यंत्री अमृत योजना
संजय कुशवाहा - उपयंत्री सिविल - यहायक यंत्री अमृत योजना
अभिनव मिश्र - उपयंत्री - सहायक यंत्री स्वच्छता सेल
मनीष तड़से - उपयंत्री -उदृयान अधिकारी
दीप्ति भानारिया - उपयंत्री - सहायक यंत्री
अनिकेत गौरिया उपयंत्री - संभागीय यंत्री जोन 10
