
वाराणसी. हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का त्योहार अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन घरों और मंदिरों में विघ्नहर्ता भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधिवत पूजा की जाती है. ऐसा माना जाता है कि गणपति बप्पा की पूजा से सभी संकट दूर होते हैं और घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. इस बार गणेश चतुर्थी 27 सितंबर को मनाई जाएगी, जिसे लेकर श्रद्धालु बाजारों से गणेश प्रतिमा की खरीदारी में व्यस्त हैं.
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि गणेश जी की प्रतिमा केवल सुंदरता के आधार पर नहीं चुननी चाहिए, बल्कि धार्मिक और वास्तु शास्त्र से जुड़े कुछ नियमों का ध्यान रखना भी आवश्यक है. अन्यथा पूजा का शुभ फल मिलने के बजाय नकारात्मक असर भी पड़ सकता है.
रखें ये सावधानियां
भगवान गणेश की प्रतिमा खरीदते समय सबसे पहले उनके सूंड पर ध्यान देना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार, घर या पूजा पंडाल में वही मूर्ति शुभ मानी जाती है, जिसमें गणेश जी का सूंड बाईं ओर मुड़ा हो. ऐसी प्रतिमा से घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि आती है. इसके अलावा मूर्ति में गणेश जी के हाथ में मोदक या लड्डू होना चाहिए और पास में उनका वाहन मूषक अवश्य होना चाहिए.
ध्यान रखें कि दक्षिणावर्ती यानी दाईं ओर मुड़े सूंड वाली मूर्ति घर या पंडाल में स्थापित नहीं करनी चाहिए, क्योंकि उसकी पूजा तांत्रिक विधि से की जाती है और यह सामान्य पूजा के लिए अशुभ मानी जाती है. इसलिए गणेश चतुर्थी के लिए मूर्ति खरीदते समय वास्तु और शास्त्र के इन नियमों का पालन करना अति आवश्यक है.
पूजा में पत्ते की परंपरा
गणेश चतुर्थी 2025 का पर्व इस बार भी पूरे देश में हर्ष और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा. घर-घर और पंडालों में बप्पा की भव्य स्थापना होगी, जहां भक्तजन उन्हें मोदक, लड्डू और पुष्पों से सजाकर पूजन करेंगे. इस अवसर पर एक विशेष परंपरा निभाई जाती है जिसे पत्र पूजा कहा जाता है. इसमें भगवान गणेश को 21 अलग-अलग प्रकार के पत्ते अर्पित किए जाते हैं. यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है.