जबलपुर। संभाग की सबसे बड़ी कृषि उपज मंडी में प्रबंधन की मिलीभगत से मनमानी की जा रही है, जिससे बाहर से आने वाले किसानों को उनके लिए बनाया गया शेड नहीं मिल पा रहा है। शेड में किसानों की जगह भारी वाहनों की पार्किग की जा रही है। लोग कहते हैं कि यह पार्किंग ऐसी है कि इसमें एक-एक हफ्ते भारी वाहन खड़े रहते हैं और किसानों को अपनी फसल धूप-पानी में रखनी पड़ रही है। मामले में प्रबंधन की दलील है कि इसे जल्द दिखवाया जाएगा। सवाल इस बात पर उठ रहा है कि मंडी सीमित दायरे में हैं, इसके बाद प्रशासनिक कमजोरी सामने आ रही है, जिससे मनमानी उजागर हो रही है। इसकी निगरानी करने वाले अफसर भी खामोश हैं, जबकि यहां संयुक्त संचालक भी देखरेख में हैं।
कृषि उपज मंडी परिसर में 10-12 शेड बने हुए हैं। इन शेडों के बनाए जाने का मकसद यह था कि बाहर से आने वाले किसान अपनी फसल रख सकें। किसानों की फसल का नुकसान न हो, लेकिन मौजूदा हालात विषम हो गए हैं। इन शेडों में भारी वाहनों सहित कारों की पार्किंग हो रही है। इससे किसानों को फसल रखने की जगह नहीं मिल रही है। किसान जहां-तहां अपनी फसल रखकर उसे विक्रय कर रहे हैं। इसमें आंधी-पानी में किसानों को नुकसान हो रहा है।
भारी वाहनों से फर्श चौपट
जानकार कहते हैं कि भारी वाहनों की आवाजाही से शेड के नीचे बनाया गया फर्श चौपट हो रहा है। फर्श पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। प्लास्टर उधड, गया है। भारी वाहनों की हाइट की वजह से शेड के किनारे क्षतिग्रस्त हो गए हैं। यह एक शेड का मामला नहीं है बल्कि अधिकांश शेडों की स्थिति यही हो गई है।
यह कहते हैं जिम्मेदार
शेड के मामले में पहले कार्रवाई की गई थी। इसे जल्द दिखवाया जाएगा। अवैध रूप से खड़े होने वाले वाहनों को हटाया जाएगा।
आरके सैय्याम, सचिव, कृषि उपज मंडी
