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आयुध निर्माणियों के निगमीकरण पर जबलपुर में प्रतिरक्षा मजदूर संघ की बैठक, अध्यक्ष बोले- नए दौर में आर्डनेंस फैक्ट्रियों में चुनौती बढ़ी

जबलपुर. भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (बीएमएस) के एमईएस विंग की प्रदेश स्तरीय बैठक जबलपुर में आयोजित की गई, जिसमें संघ के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष मुकेश सिंह और प्रदेश अध्यक्ष आशीष सिंह सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में भोपाल, महू, सागर, इटारसी, जबलपुर, पचमढ़ी, जी-ईस्ट और जी-वेस्ट ब्रांच के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। एक दिवसीय इस बैठक में मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (एमईएस) से जुड़े स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई।

निगमीकरण को लेकर चिंता

उत्तर प्रदेश के कानपुर से पहुंचे राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने पहले भारत सरकार के अधीन आने वाले केंद्रीय सुरक्षा संस्थानों को सात कंपनियों में बांटकर निगमीकरण कर दिया है। उन्होंने कहा कि आयुध निर्माणियों के निगमीकरण से नई चुनौतियां जरूर आई हैं, लेकिन कर्मचारियों ने अपनी निष्ठा और कार्यकुशलता से यह सिद्ध किया है कि उनका कार्य पहले जैसा ही है। मुकेश सिंह ने कहा, कर्मचारी कभी नहीं चाहते थे कि आयुध निर्माणियों का निगमीकरण हो। आज भी हमारी सरकार से मांग है कि निगमीकरण को समाप्त कर पुरानी स्थिति बहाल की जाए।

कर्मचारियों में चिंता, विकल्प पत्र भरवाये जा रहे

मुकेश सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार देशभर के कर्मचारियों से यह पूछ रही है कि वे कॉरपोरेट संरचना में काम करना चाहते हैं या भारत सरकार के अधीन रहना चाहते हैं। इसके लिए विकल्प पत्र भरवाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ज्यादातर कर्मचारी सरकार के अधीन रहना चाहते हैं क्योंकि भविष्य की गारंटी वहीं है।

स्थानीय मुद्दों पर चर्चा

जबलपुर प्रवास के दौरान मुकेश सिंह ने ओएफके, जीसीएफ, व्हीएफजे और जीआईएफ फैक्ट्रियों का दौरा कर अधिकारियों से मुलाकात की। फैक्ट्रियों में वर्कलोड और लगातार हो रही घटनाओं को लेकर चर्चा की गई। उन्होंने कहा, निगमीकरण के बाद कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ा है और उन्हें लक्ष्य समय पर पूरा करने का दबाव भी है। लेकिन यदि अधिकारी अपने अधीनस्थों से संवाद बनाए रखें, तो दबाव में भी बेहतर काम हो सकता है।

आयुध निर्माणियों को निजी हाथों में सौंपने की योजना नहीं

मुकेश सिंह ने कहा कि देशभर की 42 आयुध निर्माणियों का निगमीकरण हो चुका है, लेकिन फिलहाल उन्हें निजी हाथों में सौंपने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने बताया कि कई निजी कंपनियों को भी गोला-बारूद बनाने के लाइसेंस मिल चुके हैं, लेकिन सरकारी और निजी दोनों क्षेत्र अपने-अपने स्तर पर कार्य कर रहे हैं।

प्रदेश कार्यकारिणी की भूमिका

प्रदेश अध्यक्ष आशीष सिंह ने बताया कि बैठक का उद्देश्य था कि तीन माह में प्रदेश पदाधिकारी और छह माह में कार्यसमिति के पदाधिकारी एकत्र होकर अब तक किए गए कार्यों की समीक्षा करें। साथ ही, शासन की नीतियों में आई समस्याओं और सदस्यों को आ रही कठिनाइयों पर चर्चा कर समाधान निकाला जाए। बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य दशरथ, रमाकांत, देवेन्द्र विश्वकर्मा, राकेश पटेल, संदेव सिंह, शिव सोनी, अमित राय, विमल चक्रवर्ती, वचन शर्मा, सुभाष पटेल, नर बहादुर गजभिये समेत बड़ी संख्या में पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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