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बिहार में मतदाता सूची विवाद, केन्द्रीय चुनाव आयोग दी बड़ी राहत, अब बिना पूरे दस्तावेज के भी भर सकेगे फार्म

 


नई दिल्ली/पटना। बिहार में वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) में नाम जुड़वाने को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्रीय चुनाव आयोग ने लोगों को बड़ी राहत दी है। आयोग ने राज्य भर के अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापन देकर साफ किया है कि अब बिना पूरे ज़रूरी दस्तावेज़ और फोटो के भी फॉर्म भरकर जमा किए जा सकते हैं। यह फॉर्म बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को देना होगा।

                        चुनाव आयोग ने बताया है कि यदि आपके पास ज़रूरी दस्तावेज़ हैं तो इससे आपका आवेदन (फॉर्म) जल्दी आगे बढ़ेगा। लेकिन अगर आपके पास ज़रूरी दस्तावेज़ नहीं हैं तो भी घबराने की ज़रूरत नहीं है। ऐसे में चुनाव अधिकारी स्थानीय जांच या दूसरे सबूतों के आधार पर आपके आवेदन पर फैसला ले सकते हैं। एक और बड़ी राहत यह है कि जो लोग 1 जनवरी 2003 तक वोटर लिस्ट में पहले से शामिल हैं] उन्हें फॉर्म के साथ कोई दस्तावेज़ जमा करने की ज़रूरत नहीं होगी। चुनाव आयोग बिहार में वोटर लिस्ट की बहुत गहरी जांच (गहन संशोधन) कर रहा है। इसके तहत बिहार में 1987 के बाद जन्मे लगभग 2.93 करोड़ मतदाताओं को अपनी जन्मतिथि व जन्मस्थान के साथ-साथ अपने माता-पिता की जन्मतिथि व जन्मस्थान की पुष्टि करने वाले दस्तावेज़ भी दिखाने पड़ रहे थे। इस फैसले की कई विपक्षी पार्टियों ने कड़ी आलोचना की थी। क्योंकि इसे बहुत मुश्किल माना जा रहा था। चुनाव आयोग ने पहले उन लोगों के लिए 11 खास दस्तावेज़ों में से कोई एक देना ज़रूरी कर दिया था, जिनके नाम 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं थे। इन 11 दस्तावेज़ों में जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र व सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन भुगतान आदेश शामिल थे। लेकिन आधार कार्ड इन 11 दस्तावेज़ों की लिस्ट में नहीं था। चुनाव आयोग के नए विज्ञापन के मुताबिक फॉर्म जमा करने की आखिरी तारीख 26 जुलाई है। वोटर लिस्ट की आखिरी लिस्ट 30 सितंबर को जारी की जाएगी।


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