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रेल मंत्रालय का सभी रेलवे जोन को निर्देश, बिना पूर्व इजाजत के इंजीनियरिंग ट्रॉली चलाने पर लगाई रोक, ये है कारण

नई दिल्ली. रेल मंत्रालय ने सभी रेलवे जोन को निर्देश दिया है कि रेलवे ट्रैक की मरम्मत के लिए इंजीनियरिंग ट्रॉली के संचालन से पहले संबंधित विभागों से पूर्व अनुमति लेने की प्रक्रिया लागू की जाए। यह फैसला बिहार के कटिहार जिले में हुए एक हादसे के बाद लिया गया, जहां अवध असम एक्सप्रेस एक मरम्मत ट्रॉली से टकरा गई, जिससे एक रेलवे कर्मचारी की मौत हो गई थी और तीन अन्य घायल हो गए थे।

रेलवे ट्रैक मेंटेनर्स यूनियन के अनुसार, यह पुश ट्रॉली 20 जून को बिना कंट्रोल और ट्रैफिक विभाग को सूचित किए ट्रैक पर चलाई गई थी, जिससे उसी ट्रैक पर ट्रेन के गुजरने की अनुमति मिल गई और टक्कर हो गई।  रेल मंत्रालय ने सात जुलाई को सभी जोन के महाप्रबंधकों को भेजे गए पत्र में कहा, बिना ब्लॉक सुरक्षा के अब मोटर या मॉप्ड ट्रॉली चलाने पर तुरंत रोक लगा दी गई है, भले ही ट्रेन की रफ्तार कितनी भी हो। मॉप्ड ट्रॉली का यात्री ट्रेन से टकराना एक गंभीर और असामान्य घटना है। इसी तरह की घटनाओं से बचने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह फैसला लिया गया है।

बिना ब्लॉक सुरक्षा के मोटर/मॉप्ड ट्रॉली के काम को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाता है, चाहे विशेष रेलवे खंड पर गति कोई भी हो। यह असामान्य घटना है कि मॉप्ड ट्रॉली एक यात्री ट्रेन से टकराई। सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए यह निर्णय लिया गया है। 


मंत्रालय ने यह भी निर्देश दिया कि ट्रॉली और ट्रैक मरम्मत कार्य को नियंत्रित करने वाले भारतीय रेलवे स्थायी पथ मैनुअल (आईआरपीडब्ल्यूएम) में इस सुधार को शामिल किया जाए। पत्र में कहा गया, सभी संबंधित पक्षों को इसके अनुपालन के लिए निर्देशित किया जाए। ट्रैक का रखरखाव करने वाला इंजीनियरिंग विभाग ब्लॉक सुरक्षा प्रणाली के तहत ट्रैफिक और कंट्रोल विभाग को सूचित करेगा और मरम्मत के लिए ट्रैक पर मोटर ट्रॉली चलाने की अनुमति लेगा। कंट्रोल विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि उस समय अवधि में कोई ट्रेन न चले।

रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि आईआरपीडब्ल्यूएम में पहले से प्रावधान था कि संबंधित विभाग से ब्लॉक सुरक्षा की अनुमति लेने के बाद ट्रैक मरम्मत का कार्य शुरू किया जाए, लेकिन उसी समय बिना ब्लॉक अनुमति के ट्रॉली चलाने की भी अनुमति थी। अधिकारीयों ने कहा, वरिष्ठ विशेष खंड इंजीनियर (एसएसई) ट्रेन के बीच के समय अंतर को ध्यान में रखते हुए ट्रैक मेंटेनर्स के साथ मोटर ट्रॉली भेज सकते थे। लेकिन छोटी गलतियों के कारण दुर्घटनाएं होती रही हैं। कई मामले पहले भी इस वजह से हुए हैं। 


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