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वेटिंग पर कसी लगाम, अब कंफर्म होगी टिकटें


भीड़ कम करने के प्रयास में लंबी दूरी की ट्रेनों में प्रतीक्षा सूची की सीमित 

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा और ट्रेनों में भीड़ को नियंत्रित करने एक फैसला लिया है। इस पर रेल मंत्रालय ने घोषणा की है कि अब किसी भी ट्रेन में वेटिंग टिकट की संख्या ट्रेन की कुल क्षमता के 25 फीसदी तक सीमित रहेगी। इससे ट्रेनों में यात्रियों को आसानी से जगह मिल सकेगी।

रेल मं़त्रालच की रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे हर ट्रेन के एसी फर्स्ट क्लास, एसी सेकंड, एसी थर्ड, स्लीपर और चेयर कार में कुल बर्थ, सीटों में से अधिकतम 25 फीसदी वेटिंग टिकट जारी करेगा। यह बदलाव दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों जैसे अलग-अलग कोटा को ध्यान में रखते हुए किया गया है। 16 जून से लागू नए नियम के अनुसार कोच के प्रत्येक वर्ग . स्लीपर, 3एसी, 2एसी और 1एसी के लिए कोटा 25 फीसदी तक सीमित कर दिया गया है।

रेलवे के मुताबिक यह नियम सभी श्रेणियों की ट्रेनों, जैसे राजधानी, शताब्दी, दुरंतो, मेल-एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों पर लागू होगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी ट्रेन में 1,000 सीटें उपलब्ध हैं, तो अधिकतम 250 वेटिंग टिकट ही जारी किए जाएंगे। इस कदम से न केवल यात्रियों की यात्रा कन्फर्म होने की संभावना बढ़ेगी, बल्कि ट्रेनों में अनावश्यक भीड़ भी कम होगी।

ये थी पहले वेटिंग लिमिट

जनवरी 2013 के सर्कुलर के अनुसार, पहले एसी फर्स्ट क्लास में अधिकतम 30, एसी सेकंड में 100, एसी थर्ड में 300 और स्लीपर क्लास में 400 वेटिंग टिकट जारी किए जा सकते थे। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वेटिंग टिकटों की अधिक संख्या के कारण बिना कन्फर्म टिकट वाले यात्री भी आरक्षित कोच में चढ़ जाते थे, जिससे कोच में भारी भीड़ और अव्यवस्था हो जाती थी।

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