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महाकुंभ 2025: श्रद्धालुओं की दुर्दशा, रेलवे स्टेशन पर बेकाबू भीड़ और अव्यवस्था



प्रयागराज। महाकुंभ 2025 के पवित्र स्नान के बाद लाखों श्रद्धालु अपने घरों को लौटने के लिए प्रयागराज रेलवे स्टेशन पहुंचे, लेकिन यहां का दृश्य किसी आपदा से कम नहीं था। हजारों की संख्या में यात्री, जिनमें बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे शामिल थे, स्टेशन के बाहर खुले आसमान तले रात बिताने को मजबूर रहे।

रेलवे पुलिस और सुरक्षा बलों ने स्टेशन के भीतर प्रवेश पर रोक लगा दी, जिससे श्रद्धालुओं की परेशानियां बढ़ गईं। अधिकारियों का कहना था कि स्टेशन के भीतर पहले से ही भारी भीड़ है, और किसी भी तरह की भगदड़ रोकने के लिए प्रवेश बंद किया गया है। लेकिन इस फैसले ने आम जनता की मुश्किलें और बढ़ा दीं।

बेबस यात्री, बदहाल व्यवस्था
बलिया, इंदौर, कर्नाटक, बिहार और देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालु घंटों से अपनी ट्रेनों का इंतजार कर रहे थे। इंदौर से आए एक यात्री ने कहा, "मोबाइल की बैटरी खत्म हो गई है, घरवाले भी परेशान हैं और पुलिस हमें अंदर नहीं जाने दे रही।"

वहीं, एक महिला श्रद्धालु जो रातभर स्टेशन के बाहर लेटी रहीं, बोलीं, "हम सुबह से लाइन में खड़े हैं, लेकिन कोई जानकारी देने वाला नहीं है। पुलिस हमें 'पागलों की लाइन' में खड़े रहने को कह रही है।"

भगदड़ का डर, हादसों की आहट
बीते 24 घंटे में भगदड़ की कई घटनाएं हो चुकी हैं। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि रात 12 बजे से 2 बजे के बीच भारी दबाव के कारण महिलाएं और बुजुर्ग गिर पड़े। "मैं खुद इस भगदड़ में फंसा था। कई बुजुर्ग और महिलाएं जमीन पर गिरकर दब गए। प्रशासन पूरी तरह फेल हो गया।"

रेल सेवाएं चरमराई, कोई ठोस समाधान नहीं
रेलवे द्वारा दावा किया गया था कि अतिरिक्त ट्रेनें चलाई जाएंगी, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके उलट थी। ट्रेनें 14 से 24 घंटे तक देरी से चल रही थीं, और यात्रियों को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही थी।

बनारस से दरभंगा जाने वाले एक यात्री ने बताया, "हम दो दिन से भटक रहे हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं मिल रहा।" यात्री विश्रामालय और आश्रय स्थलों में जगह नहीं थी, जिससे लोगों को खुले में रात गुजारनी पड़ी।

प्रशासन की लापरवाही, जनता की बेबसी
भगदड़ और अव्यवस्था के बीच रेलवे प्रशासन और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। न पानी की व्यवस्था थी, न भोजन की, और न ही किसी मदद की उम्मीद। हालात इतने खराब थे कि लोग यह सोचने को मजबूर थे कि वे घर लौट भी पाएंगे या नहीं।

क्या प्रशासन कोई सबक सीखेगा?
महाकुंभ जैसे विराट आयोजन में भीड़ प्रबंधन प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है। लेकिन इस बार की अव्यवस्था ने व्यवस्थागत विफलता को उजागर कर दिया। श्रद्धालुओं की परेशानियों को देखते हुए प्रशासन को तत्काल राहत उपाय करने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

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