जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा की एकल पीठ ने छतरपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता इम्तियाज अहमद सिद्दीकी को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी है। इस मामले में एक साथी महिला वकील ने उनके विरुद्ध विवाह का झूठा वादा कर शारीरिक शोषण करने तथा धर्म परिवर्तन कराने जैसे अत्यंत गंभीर आक्षेप लगाते हुए कानूनी शिकायत दर्ज कराई थी। पूरे प्रकरण में आरोपी पक्ष की तरफ से पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट मनीष दत्त ने अदालत के समक्ष अपनी मुख्य दलीलें प्रस्तुत कीं। उन्होंने पीठ को अवगत कराया कि दोनों पक्षकार परिपक्व, बालिग होने के साथ-साथ कानून के जानकार पेशेवर वकील हैं, जिसके चलते उनके मध्य परस्पर सहमति और व्यक्तिगत इच्छा से ही संपर्क स्थापित हुए थे।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं
अदालत में प्रकरण की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता स्वयं विधि व्यवसाय से जुड़ी हुई हैं और जीवन से जुड़े हर निर्णय की कानूनी समझ रखती हैं। ऐसे में किसी प्रकार के धोखे अथवा दबाव की बात आधारहीन सिद्ध होती है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता और परस्पर सहमति के कानूनी बिंदुओं को रेखांकित करते हुए उन्होंने अग्रिम राहत देने की मांग रखी।
पीठ ने कानूनी पहलुओं को आधार माना
राज्य पक्ष और बचाव पक्ष के तर्कों का गहराई से परिशीलन करने के पश्चात एकल पीठ ने उपलब्ध दस्तावेजों और परिस्थितियों को ध्यान में रखा। अदालत ने माना कि बालिग अधिवक्ताओं के मध्य आपसी रजामंदी से विकसित संबंध प्रथम दृष्टया आपराधिक दायरे में नहीं आते। इन्हीं निष्कर्षों को आधार बनाकर न्यायपीठ ने आरोपी को राहत प्रदान करते हुए प्रकरण का निस्तारण किया।
