khabar abhi tak

मिलावट के खिलाफ आधी-अधूरी कार्रवाई से व्यापारियों के हौसले बुलंद



जबलपुर। जिले में त्योहारी सीजन के दौरान मिलावट रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने बड़े मिठाई प्रतिष्ठानों और डेयरियों पर व्यापक दबिश दी। इस औचक निरीक्षण के दौरान हीरा स्वीट्स, चंद्रकला, केसरबानी और बीकानेरी स्वीट्स से विभिन्न प्रकार की मिठाइयों के नमूने जब्त किए गए। इसके साथ ही पंकज खोवा भंडार, जैन खोवा, मोदी खोवा और महावीर डेयरी जैसी प्रमुख दुकानों पर भी टीम ने जांच की। पूरे जिले से कुल 54 खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र करके परीक्षण के लिए भोपाल प्रयोगशाला भेजे गए। गड़बड़ी मिलने पर एक होटल को सील करने का कदम भी उठाया गया। हालांकि सैंपलिंग के बाद जुर्माना लगाने, अंतिम परिणाम जारी करने और दोषियों पर कानूनी शिकंजा कसने के मामले में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

​प्रयोगशाला भेजी गई जांच रिपोर्ट का इंतजार 

​प्रशासन ने 27 अक्टूबर तक जिले के कई इलाकों से कुल 54 नमूने एकत्र कर राज्य स्तरीय प्रयोगशाला भोपाल भेजे हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने अपनी कागजी प्रक्रिया पूरी करते हुए इसे बड़ी सफलता के रूप में प्रस्तुत किया है। जमीनी हकीकत यह है कि इन नमूनों की जांच रिपोर्ट कब तक आएगी और उसमें क्या निष्कर्ष निकलेंगे, इसका कोई स्पष्ट समय तय नहीं किया गया है। जब तक प्रयोगशाला से गुणवत्ता स्तर के आंकड़े सामने नहीं आते, तब तक मिलावटखोरों पर कोई ठोस कानूनी शिकंजा नहीं कसा जा सकता। हर वर्ष त्योहारी समय में केवल सैंपल लेकर जिम्मेदारी खत्म मान लेने की परंपरा सी बन गई है।

​अंतिम नतीजे बताए बिना ठंडी पड़ी कार्रवाई

​अधिकारियों ने बड़े शोर-शराबे के साथ शहर के बाजार में छापे मारे और एक होटल को सील भी किया। इसके बावजूद जांच के बाद की स्थिति जस की तस बनी हुई है। विभाग ने अब तक यह सार्वजनिक नहीं किया है कि कितने व्यापारियों पर नियमानुसार जुर्माना लगाया गया या कितनों के खिलाफ न्यायालय में प्रकरण दर्ज किए गए। केवल दुकानों पर दबिश देकर फोटो खिंचवाने और जांच का आंकड़ा गिनाने से आम जनता को शुद्ध खाद्य सामग्री नहीं मिल सकती। जब तक अंतिम नतीजे तय कर सख्त वसूली और सजा नहीं होगी, तब तक मिलावट के अवैध कारोबार पर रोक लगना पूरी तरह असंभव दिखाई देता है।

​छोटे दुकानदारों की तुलना में बड़े प्रतिष्ठान बेपरवाह

​निरीक्षण अभियान में छोटे विक्रेताओं के साथ-साथ शहर के नामी मिष्ठान केंद्रों को भी शामिल किया गया था। अक्सर देखा जाता है कि छोटे व्यापारियों पर तत्काल सख्ती बरती जाती है, जबकि रसूखदार प्रतिष्ठानों के मामलों में प्रक्रिया बेहद धीमी पड़ जाती है। नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को हर स्तर के कारोबारी के साथ एक समान नीति अपनानी चाहिए। अगर किसी प्रतिष्ठित दुकान पर अमानक सामग्री पाई गई है, तो उसका नाम और उस पर हुई कानूनी कार्रवाई का विवरण भी पूरी पारदर्शिता के साथ सामने आना जरूरी है।

Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak