जबलपुर। भोपाल-रामगंज मंडी नई रेल लाइन परियोजना के तहत सोनकच्छ-नरसिंहगढ़ के नवनिर्मित 13 किलोमीटर रेलखंड का मंगलवार को मध्य वृत्त के रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) गुरु प्रकाश ने निरीक्षण किया। इस दौरान रेलखंड पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति से स्पीड ट्रायल भी किया गया।
सीआरएस ने रेलखंड की संरक्षा, तकनीकी गुणवत्ता और यात्री व मालगाड़ियों के सुरक्षित संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं का परीक्षण किया। मोटर ट्रॉली से ट्रैक, पुलों, समपार फाटकों, सिग्नल एवं दूरसंचार प्रणाली सहित अन्य रेल अवसंरचनाओं का निरीक्षण किया गया। स्पीड ट्रायल से पहले सोनकच्छ और नरसिंहगढ़ स्टेशन यार्ड की भी जांच की गई।
276 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में कुल 27 स्टेशन प्रस्तावित हैं। इसका 111 किलोमीटर हिस्सा भोपाल मंडल और 165 किलोमीटर हिस्सा कोटा मंडल के अंतर्गत आता है। सोनकच्छ-नरसिंहगढ़ रेलखंड के निरीक्षण के साथ भोपाल मंडल में निशातपुरा से कुरावर, ब्यावरा राजगढ़ से सोनकच्छ और सोनकच्छ से नरसिंहगढ़ तक कुल 89 किलोमीटर रेल लाइन का काम पूरा हो चुका है। शेष 22 किलोमीटर लंबे नरसिंहगढ़-कुरावर खंड को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
42 किमी छोटा होगा रेलमार्ग
परियोजना पूरी होने पर मध्य प्रदेश के भोपाल, सीहोर और राजगढ़ तथा राजस्थान के झालावाड़ और कोटा जिले रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे। नया रेलमार्ग ब्यावरा-झालावाड़ मार्ग की तुलना में करीब 42 किलोमीटर छोटा होगा। इससे यात्रियों के समय और रेल संचालन में ईंधन की बचत होगी। भोपाल मंडल में 111 किलोमीटर रेल लाइन और 12 स्टेशनों के निर्माण के लिए 1,255 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
निरीक्षण के दौरान भोपाल मंडल के डीआरएम पंकज त्यागी, मुख्य परियोजना प्रबंधक पंकज स्वाइन, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) एमएस हाशमी, उप मुख्य अभियंता (निर्माण) मोहम्मद वसीम सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। परियोजना पूरी होने से भोपाल और कोटा मंडल के स्टेशनों के बीच रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इससे यात्री परिवहन के साथ माल ढुलाई को भी गति मिलने की उम्मीद है।
