जबलपुर/कोटा. वेस्ट सेन्ट्रल रेलवे एम्प्लॉईज यूनियन (डबलूसीआरईयू) के महामंत्री, ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (एआईआरएफ) के सहायक महामंत्री एवं हिन्द मजदूर सभा (एचएमएस) के राष्ट्रीय सचिव कॉमरेड मुकेश गालव अंतरराष्ट्रीय ट्रेड यूनियन संगठनों के आमंत्रण पर मलेशिया एवं इंडोनेशिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लेकर भारतीय श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करेंगे.
यूनियन के कोषाध्यक्ष इरशाद खान ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि कॉमरेड मुकेश गालव 21 एवं 22 अक्टूबर 2026 को मलेशिया की राजधानी क्वालालंपुर में तथा 23 एवं 24 अक्टूबर 2026 को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित एशिया-प्रशांत क्षेत्र के श्रमिकों के व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा संबंधी सम्मेलनों में भाग लेंगे. इन सम्मेलनों में विभिन्न एशियाई देशों के श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि श्रमिकों की सुरक्षा, कार्यस्थल पर स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों तथा सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे.
इसके अतिरिक्त, 27 से 31 अक्टूबर 2026 तक मलेशिया के क्वालालंपुर में आयोजित होने वाले व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से संबंधित 40वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कॉमरेड मुकेश गालव भारत की ओर से हेड डेलीगेट के रूप में प्रतिनिधित्व करेंगे. इस दौरान एशियाई देशों में श्रमिकों के लिए प्रभावी सुरक्षा मानक लागू करने, कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं की रोकथाम तथा श्रमिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.
इरशाद खान ने कहा कि वर्तमान समय में श्रमिकों को असुरक्षित कार्यस्थलों, व्यावसायिक बीमारियों, ठेका प्रथा, अपर्याप्त सुरक्षा उपकरणों, लंबे कार्य घंटों, कार्य के बढ़ते दबाव तथा स्वास्थ्य एवं सुरक्षा नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. विशेष रूप से ठेका श्रमिकों एवं असंगठित क्षेत्र के कामगारों को पर्याप्त सुरक्षा सुविधाएं, नियमित स्वास्थ्य जांच और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है. उन्होंने कहा कि रेलवे, सीमेंट उद्योग एवं अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों के लिए सुरक्षित कार्यस्थल, गुणवत्तापूर्ण सुरक्षा उपकरण, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, व्यावसायिक बीमारियों की समय पर पहचान, दुर्घटनाओं की जवाबदेही तथा श्रमिकों की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है. श्रमिकों की सुरक्षा को केवल औपचारिकता न मानकर नियोक्ताओं और संबंधित संस्थानों की प्राथमिक जिम्मेदारी बनाया जाना चाहिए.
