जबलपुर। ग्रीन सिटी क्षेत्र में रहने वाली दो अनाथ बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए जिला साहू समाज ने अपने शिक्षा सहायता कोष से 50,000 रुपये का आर्थिक अनुदान प्रदान किया है। माता-पिता के साये से वंचित हो चुकीं स्वर्गीय संदीप साहू की बेटियों 11वीं कक्षा की समृद्धि साहू और 5वीं कक्षा की सृष्टि साहू को स्कूल फीस भरने हेतु 25,000-25,000 रुपये के चेक सौंपे गए। इस अवसर पर समाज के संरक्षक प्रभात साहू, अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार साहू, उपाध्यक्ष डी.के. साहू, शिक्षा सहायता कोष अध्यक्ष सुबोध साहू, प्रचार मंत्री राज साहू सहित कार्यकारिणी सदस्य रवि साहू, प्रीतम लाल साहू और डॉ. निशा साहू उपस्थित रहे, जिन्होंने संकटग्रस्त परिवार की दोनों होनहार छात्राओं को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
विपरीत हालात में संवरेगा दोनों अनाथ बालिकाओं का भविष्य
अभिभावकों के आकस्मिक निधन के पश्चात दोनों नाबालिग बहनों के सिर से साया छिन गया था। ऐसी विकट पारिवारिक और आर्थिक स्थिति में बालिकाओं के लालन-पालन के साथ-साथ उनके स्कूली अध्ययन पर संकट मंडराने लगा था। परिवार पर अचानक टूटे इस दुख के पहाड़ के बीच शिक्षा बंद होने की गंभीर आशंका बन गई थी। संकट की इस घड़ी को गंभीरता से लेते हुए सामाजिक संगठन ने आगे आकर यह सुनिश्चित किया कि संसाधनों के अभाव में बालिकाओं की प्रगति न रुके। दोनों छात्राओं के शैक्षणिक स्तर और वार्षिक शैक्षिक व्यय का उचित आकलन करते हुए संगठन ने विशेष तौर पर स्थापित अपने शिक्षण कोष का उपयोग किया। इस फंड से सीधे संबंधित शिक्षण संस्थान की देय फीस का भुगतान चेक के जरिए कराया गया, ताकि दोनों बहनों का दाखिला सुरक्षित रहे और वे बिना किसी मानसिक दबाव के अपनी कक्षाओं में नियमित अध्ययन जारी रख सकें।
सामूहिक एकजुटता से मजबूत हुई सेवा और सहयोग की भावना
संगठन के पदाधिकारियों ने इस कदम को किसी व्यक्तिगत उपकार के बजाय एक जिम्मेदार नागरिक मंच का अनिवार्य मानवीय दायित्व बताया। विपरीत परिस्थितियों से जूझ रहे असहाय और अनाथ बच्चों को मुख्यधारा में बनाए रखने के लिए ऐसी संस्थागत मदद बेहद कारगर मानी गई है। पदाधिकारियों ने रेखांकित किया कि जब संकटग्रस्त परिवारों को समुदाय की ओर से तत्काल संबल मिलता है, तो बच्चों में निराशा की जगह जीवन में कुछ बेहतर करने का आत्मविश्वास पैदा होता है। इस संयुक्त पहल ने यह संदेश दिया कि सक्षम लोगों को संकटग्रस्त बच्चों की प्राथमिक और माध्यमिक पढ़ाई के लिए लगातार संवेदनशील रहना चाहिए। पदाधिकारियों ने अन्य सक्षम नागरिकों से भी आह्वान किया कि वे अपने आसपास के अभावग्रस्त परिवारों के प्रति जागरूक रहें। सामाजिक स्तर पर समय रहते उठाया गया ऐसा संवेदनशील कदम जरूरतमंद बच्चों को भटकने से बचाकर उनके लिए सम्मानजनक जीवन के रास्ते खोलता है।
