जबलपुर। जबलपुर में जारी 70वीं राज्य शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में भोपाल और मेजबान जिले के प्रतिभागियों ने बेहतरीन दांव-पेंच दिखाए। 5 से 8 अक्टूबर तक चलने वाले इस खेल आयोजन में नौ संभागों के 700 खिलाड़ी तथा निर्णायक अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। मैट पर सत्यम कुमार, कृष सिंह, सुमित, चेतन, आकांक्षा, साक्षी गुप्ता, दुर्गा ठाकुर, कीर्ति चौधरी और गुरनीश कौर ने पदक जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। यह प्रतिष्ठित मुकाबला स्कूली छात्र-छात्राओं के खेल कौशल को उभारने का बड़ा मंच बना है, जहां प्रदेश भर की युवा प्रतिभाएं अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं।
मैट पर भोपाल और जबलपुर के बीच भिड़ंत
एमएलबी स्कूल परिसर में आयोजित जूडो के बालक 14 वर्ष वर्ग में भोपाल संभाग ने तकनीकी रूप से मजबूत खेल पेश किया। इसके 25 किलो वर्ग में सत्यम कुमार ने अपनी फुर्ती से प्रतिद्वंद्वी को हराकर पहला स्थान पाया। 30 किलो वर्ग में कृष सिंह ने उम्दा दांव लगाकर विजय दर्ज की। 40 किलो वर्ग में सुमित ने आक्रामक खेल से पहला स्थान सुरक्षित किया। 35 किलो वर्ग में उज्जैन संभाग के चेतन ने सटीक तकनीक से स्वर्ण पर कब्जा जमाया।
बालिका वर्ग के 14 वर्ष मुकाबलों में जबलपुर और भोपाल के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। 23 किलो वर्ग में जबलपुर की आकांक्षा ने विपक्षी खिलाड़ी को परास्त कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया। 27 किलो भार वर्ग में भोपाल की साक्षी गुप्ता ने बाउट जीतकर विजय हासिल की। 32 किलो वर्ग में भोपाल की दुर्गा ठाकुर ने अपने दांवों के दम पर पहला स्थान अपने नाम किया। 36 किलो वर्ग में जबलपुर की कीर्ति चौधरी ने जोरदार प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक पर अपना दावा पक्का किया। इस आयु वर्ग के अलावा जूडो में 17 और 19 वर्ष आयु वर्ग के मुकाबले भी कार्यक्रम अनुसार संपन्न कराए जा रहे हैं।
गतका में इंदौर उज्जैन और जबलपुर अव्वल
मदनमहल स्थित दशमेश हॉल में परंपरागत मार्शल आर्ट गतका के 17 और 19 वर्ष आयु वर्ग के मुकाबले आयोजित किए गए। 17 वर्ष बालिका वर्ग की फरी सोटी स्पर्धा में उज्जैन की टीम ने फुर्तीले प्रदर्शन के साथ पहला स्थान हासिल किया। एकल सोटी टीम स्पर्धा में इंदौर की बालिकाओं ने अनुशासन और गति के दम पर शीर्ष क्रम हासिल किया। इसी आयु वर्ग की फरी सोटी एकल स्पर्धा में जबलपुर की गुरनीश कौर ने अपनी पारंपरिक युद्ध कला का सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दोनों खेल स्थलों पर विभिन्न संभागों के तकनीकी अधिकारियों और प्रशिक्षकों की देखरेख में सभी राउंड पूरे कराए जा रहे हैं।

