khabar abhi tak

ट्रैक मेंटेनरों को हैवी औजारों से मिलेगी राहत, रेलवे बोर्ड ने शुरू की आधुनिक टूल्स अपनाने की कवायद, कमेटी गठित

नई दिल्ली. रेल लाइनों की निगरानी और रखरखाव करने वाले गैंगमैन, की-मैन और पेट्रोलमैन (ट्रैक मेंटेनर) को अब भारी औजार ढोने से राहत मिलेगी। रेलवे बोर्ड ने इनके इस्तेमाल में आने वाले टूल्स (औजार) की व्यापक समीक्षा कर उन्हें आधुनिक बनाने की कवायद शुरू की है। इसके लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति को गठन के 30 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को सौंपनी होगी।

रेलवे बोर्ड के सिविल इंजीनियरिंग निदेशालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार, समिति बाजार में उपलब्ध नए और आधुनिक टूल्स, सामग्री और तकनीक की पहचान करेगी। इनमें हल्के वजन वाले, आरामदायक, बहुउद्देश्यीय और बेहतर डिजाइन वाले औजार को प्राथमिकता दी जाएगी। रेलवे बोर्ड के डायरेक्टर (सिविल इंजीनियर) सौरभ जैन ने कहा है कि मौजूदा औजार की उपयोगिता और आवश्यकता की समीक्षा की जाएगी। यह देखा जाएगा कि की-मैन और पेट्रोलमैन को ड्यूटी के दौरान कौन-कौन से औजार अनिवार्य रूप से साथ लेकर चलने पड़ते हैं।

उनकी ड्यूटी की प्रकृति, उपलब्ध आधुनिक विकल्प और सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए औजार की संख्या को युक्तिसंगत बनाने की संभावना तलाशी जाएगी। औजार को कम या बदलने की प्रक्रिया में ट्रैक के निरीक्षण, रखरखाव और सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं किया जाएगा। समिति यह भी आकलन करेगी कि वर्तमान व्यवस्था में कौन से औजार अब भी जरूरी हैं और उनकी जगह आधुनिक विकल्प इस्तेमाल किए जा सकते हैं। तीन सदस्यीय समिति मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा के बाद आधुनिक औजार को अपनाने और अनावश्यक औजार को हटाने अथवा युक्तिसंगत बनाने संबंधी सुझाव देगी। समिति में नार्दन रेलवे और नार्थ सेंट्रल रेलवे के चीफ ट्रैक इंजीनियर (सीटीई) तथा रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (ट्रैक मशीन) शामिल हैं।

Post a Comment

Previous Post Next Post
khabar abhi tak
khabar abhi tak
khabar abhi tak