जबलपुर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर खंडपीठ में न्यायमूर्ति मनेंद्र एस भट्टी की एकलपीठ ने सूरजपुरा जलाशय परियोजना में अधिग्रहित कृषि भूमि के कम प्रतिकर विवाद पर सागर जिले की केसली तहसील स्थित ग्राम पोलोह के किसान रामनारायण को बड़ी राहत प्रदान की है। याचिका पर 14 अक्टूबर 2026 को सुनाए फैसले में अदालत ने भूमि अधिग्रहण के पुराने विवादित आदेश को शून्य घोषित कर दिया। जल संसाधन विभाग द्वारा जनहित योजना के विस्तार के दौरान कृषक की खसरा क्रमांक 89/2 की 0.10 हेक्टेयर तथा खसरा क्रमांक 174/3 की 0.61 हेक्टेयर रकबा भूमि अधिग्रहित की गई थी। इस विधिक लड़ाई में पीड़ित का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और अधिवक्ता कविता अहिरवार ने मजबूती से रखा।
अदालत ने तय की 60 दिन की मियाद
राजस्व अभिलेख वर्ष 2012-13, पटवारी नक्शे, मौके पर मौजूद नलकूप और मोटर पंप के दस्तावेजी साक्ष्यों की मौजूदगी के उपरांत भी 7 नवंबर 2014 के संशोधित अवार्ड में रकबे को असिंचित श्रेणी में दर्ज कर दरें तय कर दी गई थीं। काश्तकार ने इस विसंगति के विरुद्ध आपत्ति दर्ज कराकर भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 की धारा 64 का सहारा लिया था। किसान ने मुआवजे की निष्पक्ष समीक्षा हेतु प्रकरण सक्षम संदर्भ न्यायालय भेजने का प्रार्थना पत्र दिया, जिसे जिला दंडाधिकारी ने 19 फरवरी 2017 को सीधे खारिज कर दिया। पीठ ने स्पष्ट रेखांकित किया कि धारा 64 के अंतर्गत कलेक्टर को विवाद के मेरिट पर खुद अंतिम निर्णय सुनाने का अधिकार नहीं है, बल्कि विधि सम्मत व्यवस्था के तहत मामले को संदर्भ प्राधिकारी को प्रेषित करना अनिवार्य दायित्व है। इस न्यायिक चूक को सुधारते हुए खंडपीठ ने 19 फरवरी 2017 का निरस्तीकरण आदेश रद्द कर दिया। सागर कलेक्टर को निर्देश दिए गए हैं कि वे अधिनियम के प्रावधानों के तहत कृषक के मूल आवेदन का परीक्षण कर 60 दिनों की तय अवधि में नया वैधानिक आदेश पारित करें।
