जबलपुर। प्रेस्टीजियस पीस अवॉर्ड काउंसिल की ओर से पश्चिम विहार नई दिल्ली स्थित होटल रेडिसन ब्लू में एक गरिमामय समारोह आयोजित किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में रामायण केंद्र जबलपुर इकाई के संयोजक इंजी. संतोष कुमार मिश्र असाधु को श्रीरामचरितमानस पर निरंतर किए जा रहे शोध कार्यों के लिए डॉक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की गई। यह सम्मान पश्चिम नई दिल्ली के पूर्व सांसद महाबल मिश्रा के हाथों सौंपा गया। उल्लेखनीय है कि इसी महीने 10 अक्टूबर 2026 को चेन्नई में आयोजित समारोह में यूनाइटेड अमेरिकन यूनिवर्सिटी ने भी साहित्य, संस्कृति और मानस अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने पर उन्हें सम्मानित किया था। राष्ट्रीय राजधानी में मिले इस नए सम्मान से समूचे संस्कारधानी क्षेत्र में हर्ष की लहर दौड़ गई है।
पूर्व सांसद महाबल मिश्रा ने दिल्ली में सौंपा सम्मान
आयोजन के उपरांत नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने मानस के दार्शनिक पक्षों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पावन कृति केवल एक साधारण पुस्तक नहीं है, बल्कि सरल अवधी भाषा में प्रस्तुत वास्तविक वेद स्वरूप रचना है। इसमें ब्रह्म, माया और जीव के आपसी संबंधों से जुड़े अत्यंत गूढ़ एवं जटिल प्रश्नों के वैज्ञानिक तथा प्रामाणिक समाधान सहजता से मौजूद हैं, जो अन्यत्र किसी एक धार्मिक रचना में दुर्लभ हैं।
अवधी भाषा में छिपा है वेदों का परम सत्य
संतोष मिश्र ने आगे व्याख्या करते हुए कहा कि जैसे गंगाजल की हर एक बूंद पूर्णतः समान रूप से पवित्र मानी जाती है, उसी तरह इस महाग्रंथ का प्रत्येक दोहा, चौपाई, सोरठा व अन्य छंद पावन प्रभाव रखते हैं। इसमें किसी भी तरह का छोटा, बड़ा या गैर-जरूरी भेद देखना अनुचित है। उन्होंने इस वैश्विक उपलब्धि को भगवान श्रीराम के चरणों में अर्पित करते हुए इसे संस्कारधानी जबलपुर की बौद्धिक गरिमा बताया और सफलता का श्रेय परिजनों, मित्रों एवं शुभचिंतकों के निरंतर सहयोग को दिया।
