जबलपुर। भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका पर शुक्रवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ में सुनवाई तय हुई है। वहीं दूसरी ओर इस पूरे मुकदमे को भोपाल से नई दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में भी विचार संभावित है। इस प्रकरण में 33 वर्षीय मॉडल व अभिनेत्री ट्विशा शर्मा का शव 12 मई 2026 को भोपाल स्थित ससुराल में फंदे पर मिला था। उनका विवाह 9 दिसंबर 2025 को गिरिबाला सिंह के पुत्र समर्थ सिंह के साथ संपन्न हुआ था। घटना के पश्चात मृतका के मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर गंभीर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे।
जांच एजेंसी ने बदले आरोप,आया नया मोड़
शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने पति समर्थ सिंह तथा सास गिरिबाला सिंह पर दहेज हत्या, क्रूरता और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया था। भोपाल की जिला अदालत ने 15 मई को सास को अग्रिम राहत दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने 27 मई को निरस्त कर दिया था। इसके बाद दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया। मामले की जांच जब केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई, तब आरोपपत्र में बड़ा फेरबदल हुआ। एजेंसी ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2) यानी दहेज मृत्यु का आरोप हटा दिया और धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का नया आरोप जोड़ा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने जमानत अर्जी में जरूरी सुधार करने की अनुमति प्रदान की थी।
मेडिकल बोर्ड ने नकारी हमले अथवा संघर्ष की बात
परिजनों की मांग पर हाईकोर्ट के निर्देशानुसार दिल्ली एम्स के 5 सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने 24 मई को भोपाल में दूसरा पोस्टमार्टम किया था। डॉक्टरों की 11 पन्नों की रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि मौत फंदे के कारण सांस रुकने से हुई है और शरीर पर हमले या संघर्ष के कोई निशान नहीं मिले। इसके अतिरिक्त 1 जून को घटनास्थल पर क्राइम सीन का पुनर्निर्माण किया गया था। जांच के दौरान मोबाइल चैट, कॉल विवरण और ऑडियो रिकॉर्डिंग जैसे डिजिटल व फोरेंसिक साक्ष्य जुटाए गए। अब इन्हीं बदले हुए विधिक आधारों और वैज्ञानिक साक्ष्यों की रोशनी में अदालत अपना निर्णय लेगी।
