जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जजों की नई नियुक्तियों की सिफारिश को लेकर एक नई विधिक चुनौती सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा मप्र हाई कोर्ट में 7 नए जजों की नियुक्ति के लिए की गई सिफारिश के विरोध में हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव रामभजन सिंह लोधी की ओर से प्रस्तुत की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि उच्च न्यायपालिका में सभी वर्गों को समान अवसर मिलना चाहिए और सामाजिक प्रतिनिधित्व के सिद्धांत का पूर्ण रूप से पालन किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने कॉलेजियम की सिफारिश पर तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक लगाने की मांग की है, जिस पर शीघ्र सुनवाई होने की संभावना जताई गई है।
न्यायपालिका में सामाजिक प्रतिनिधित्व का तर्क रखा
याचिका के अनुसार सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 26 अक्टूबर 2026 को डॉ. विवेक शरण, राजेश कुमार शुक्ला, कनक गहरवार, भक्ति व्यास, श्रेयस पंडित, मृणाल एलकर और अनिवाश जरगर के नामों की सिफारिश जज पद के लिए की है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह एवं परमानंद साहू ने तर्क प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने कहा कि अनुशंसित 7 नामों में से 6 सामान्य वर्ग से हैं और केवल 1 ओबीसी वर्ग से हैं। वर्तमान में मप्र हाई कोर्ट में कुल 38 जज कार्यरत हैं, जिनमें से 36 सामान्य वर्ग के हैं, जबकि अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से मात्र 1-1 जज हैं। याचिका में उल्लेख किया गया कि इस असंतुलन के संबंध में पूर्व में 15 मई और 4 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति सचिवालय और प्रधानमंत्री कार्यालय को भी प्रतिवेदन भेजे गए थे।
