लोकायुक्त टीम के अधिकारियों का कहना है कि ग्वालियर के ठेकेदार गौरव तोमर को मझगांय बांध की नहर का ठेका मिला था। उनके 55 लाख रुपए तीन बिल पास हो चुके थे, पर चौथे बिल 25 लाख रुपए का भुगतान होना शेष था। उसी एवज में अधिकारियों द्वारा 45 हजा रुपए रिश्वत की मांग की जा रही थी। जिसकी शिकायत ठेकेदार द्वारा लोकायुक्त आफिस पहुंचकर एसपी से की।इसके बाद आज गौरव तोमर ने आफिस पहुंचकर एकाउंटेंट दीपक अहिरवार व क्लर्क अरविंद पाठक को जैसे ही ठेकेदार ने रुपए दिए, तभी लोकायुक्त टीम के अधिकारियों ने दबिश देकर दोनों को पकड़ लिया। डीए दीपक परिहार के पास से 15,000 और लिपिक अरविंद पाठक को 30,000 लिए थे। दोनों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू हुई। ठेकेदार गौरव तोमर ने बताया कि उन्हें तीन महीने से बिल पास कराने के लिए परेशान किया जा रहा था। अधिकारी फोन पर बात करने से बचते और पैसे मांगते थे। लोकायुक्त टीम मामले की जांच कर रही है।
कार्यपालन यंत्री बोले, जो खुशी से दे तो मैं भी रुपए ले लेता हूं, मांगता नही-
लोकायुक्त की कार्यवाही के बाद जल संसाधन संभाग पन्ना के कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार का यह बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। जिसमें उन्होने कहा कि जब उनके संज्ञान में आए मामलों में तुरंत कार्रवाई की जाती है। किसी भी कागज को रोका नहीं जाता। उन्होने कहा कि भुगतान में देरी का मुख्य कारण फंड्स की कमी होना है। उन्होंने कहां कि रिश्वत मांगना पूरी तरह से गलत है जब उनसे पूछा गया कि आपका भी कोई प्रतिशत होता है तो उन्होंने कहा कि हमारा या हमारे सब-इंजीनियर का कोई प्रतिशत या कमीशन तय नहीं है। यदि कोई अपनी खुशी से कुछ दे दे, तो बात अलग है। हम ले लेते है, लेकिन मांग करना या लेना अपराध है।