जबलपुर। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मझौली में कृषकों की जमा राशि में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और फर्जीवाड़े का गंभीर प्रकरण सामने आया है। समिति से जुड़े किसानों बैनी प्रसाद, रमेश प्रसाद, शशिभूषण, भूषा पटेल, परसलाल और श्याम बाई अथवा रतन लाल ने लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए 42,860 रुपये के गबन का आरोप लगाया है। अन्नदाताओं का कहना है कि समिति के प्रबंधकीय तंत्र ने उनसे बाकायदा धनराशि प्राप्त कर कुल 6 रसीदें थमा दीं, किंतु इस रकम को उनके अधिकृत बैंक खातों और समिति के बही-खातों में दर्ज ही नहीं किया गया। किसानों द्वारा रसीद और सरकारी खाते का मिलान करने पर भारी अंतर स्पष्ट हुआ। पीड़ितों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की गुहार लगाई है।
रसीद बुक जब्त कर थाने में प्राथमिकी दर्ज हो
किसानों का स्पष्ट कहना है कि समिति में हुआ यह छल केवल 42,860 रुपये तक सीमित नहीं है। उनका अनुमान है कि यदि समिति के पिछले 3 वर्षों के समूचे आय-व्यय व वित्तीय रजिस्टरों की बारीक पड़ताल कराई जाए, तो इसी प्रकार के कई अन्य फर्जीवाड़े उजागर हो सकते हैं। पीड़ितों ने बताया कि वे इस गड़बड़ी के विरुद्ध पहले भी 14 अगस्त और 1 सितंबर 2026 को औपचारिक शिकायतें दे चुके हैं, किंतु विभागीय स्तर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। कार्रवाई न होने से आक्रोशित अन्नदाताओं ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित रसीद बुक क्रमांक 3337 को फौरन कब्जे में लेकर सील किया जाए। इसके साथ ही समिति के प्रभारी प्रबंधक के खिलाफ संबंधित पुलिस थाने में नामजद प्राथमिकी दर्ज कर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
ऑडिट कराकर ब्याज सहित लौटाएं रकम
शिकायतकर्ताओं ने सहकारिता विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि समिति की समस्त रसीद बहियों की भौतिक जांच कराई जाए। इसके अतिरिक्त समिति के पिछले 3 सालों के वित्तीय लेन-देन का विशेष ऑडिट कराकर सत्य सामने लाया जाए। अन्नदाताओं ने यह भी मांग उठाई है कि उनकी गबन की गई पूरी धनराशि ब्याज सहित उनके खातों में लौटाई जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे खेल का वास्तविक सच विभागीय जांच, रसीद पुस्तकों की जब्ती, समिति के बही-खातों के मिलान तथा बैंक खातों के रिकॉर्ड के तकनीकी सत्यापन के उपरांत ही पूरी तरह सामने आ सकेगा।
