जबलपुर। पाटन में 18 अगस्त को सड़क, खाद, बिजली और फसलों की एमएसपी पर खरीद जैसे जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सर्वदलीय आंदोलन हुआ था। सिविल कोर्ट चौराहे पर हुए इस विशाल प्रदर्शन में किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। आंदोलनकारियों को प्रशासनिक अधिकारियों ने उच्च स्तर पर बात करके समस्याओं के त्वरित समाधान का लिखित भरोसा दिया था। इसके विपरीत पाटन पुलिस ने आंदोलन से जुड़े 5 लोगों को नामजद और 50 से 60 अन्य अज्ञात लोगों पर केस दर्ज कर लिया। इस पुलिस कार्रवाई के विरोध में क्षेत्र का सियासी पारा चढ़ गया और लोगों में भारी रोष फैल गया। पूर्व जिला पंचायत सदस्य उदयभान सिंह ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि यदि जनहित की मांग उठाना अपराध है तो हम सब अपराधी हैं। इसके बाद सैकड़ों नागरिक पाटन थाने पहुंचे।
आश्वासन देकर पाटन पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
सड़क, खाद और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों के समाधान के लिए जब जनता सड़कों पर उतरी तो सिविल कोर्ट चौराहे पर घंटों तक प्रदर्शन का दौर चला था। मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी मांगों को जायज बताते हुए लिखित आश्वासन पत्र सौंपा था। प्रदर्शनकारियों को पूरा विश्वास था कि शासन स्तर पर उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि इस भरोसे के ठीक उलट पुलिस महकमे ने प्रदर्शन खत्म होते ही आयोजकों पर कानूनी शिकंजा कस दिया। अधिकारियों के इस दोहरे रवैये ने स्थानीय रहवासियों के बीच गहरे अविश्वास और नाराजगी को जन्म दे दिया।
पुलिस ने दर्ज किया पांच नामजद केस
कानूनी दस्तावेज के अनुसार पुलिस ने 5 प्रमुख आयोजकों के नाम सीधे प्राथमिक रिपोर्ट में शामिल किए हैं, जबकि 50 से 60 अन्य अज्ञात प्रदर्शनकारियों पर भी केस बनाया गया है। जैसे ही पाटन क्षेत्र में इस मुकदमे की जानकारी फैली, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। नागरिकों का स्पष्ट आरोप है कि समस्याओं के स्थाई समाधान निकालने के बजाय लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन में शामिल किसान और मजदूर वर्ग इसे अपने अधिकारों पर सीधा हमला मान रहा है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य उदयभान सिंह ने एक सार्वजनिक वीडियो संदेश जारी करके पुलिस प्रशासन की इस कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि अपने अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं की मांग करना कोई अपराध नहीं है। यदि हक मांगना गैरकानूनी है तो क्षेत्र का हर जागरूक व्यक्ति अपनी गिरफ्तारी देने के लिए तैयार है। उनके इस आह्वान के बाद बड़ी तादाद में आम जनता, किसान और विभिन्न दलों के कार्यकर्ता एकजुट होकर पाटन थाने के परिसर में पहुंच गए और इस कार्रवाई को वापस लेने की पुरजोर मांग उठाई।
