जबलपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, मुख्य पुरानी बिल्डिंग और विक्टोरिया जिला अस्पताल सहित पाटन, मझौली तथा शहपुरा जैसे ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में आयुष्मान कार्डधारक निर्धन बीपीएल मरीजों को बरगलाने का संगठित तंत्र सक्रिय हो चुका है। भारत सरकार की नि:शुल्क उपचार योजना के तहत पंजीकृत इन गरीब परिवारों को सरकारी केंद्रों में सभी जांच, ऑपरेशन और दवा संसाधन मौजूद होने के बाद भी प्राइवेट सेंटरों में धकेला जा रहा है। इस पूरे गोरखधंधे में निजी अस्पतालों के एजेंट, रात में सक्रिय रहने वाली प्राइवेट एंबुलेंस, कुछ संदिग्ध स्वास्थ्य कर्मचारी, बाहरी फर्जी सामाजिक कार्यकर्ता तथा निजी क्लीनिकों में सेवाएं देने वाले शासकीय चिकित्सक सीधे तौर पर संलिप्त पाए जा रहे हैं, जिस पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी द्वारा सतत जांच व दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है।
एजेंटों और प्राइवेट एंबुलेंस का संगठित गिरोह सक्रिय
शासकीय चिकित्सा संस्थानों की ओपीडी, इमरजेंसी वार्ड और प्रवेश द्वारों पर निजी अस्पतालों के बिचौलिए दिन-रात पहरा देते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों जैसे पाटन, मझौली और शहपुरा से आने वाले अनपढ़ अथवा सीधे-साधे तीमारदारों को बेहतर व त्वरित उपचार का झांसा दिया जाता है। रात गहराते ही मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशलिटी परिसर के बाहर निजी एंबुलेंस का जमावड़ा लग जाता है। जैसे ही कोई गंभीर मरीज पहुंचता है, ये गिरोह तीमारदारों में सरकारी व्यवस्था के प्रति भय उत्पन्न कर देते हैं। उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता है कि निजी अस्पताल में आयुष्मान कार्ड पर वीआईपी सुविधाएं मिलेंगी, जिसके बाद मरीजों को गुपचुप तरीके से निजी संस्थानों में स्थानांतरित करवा दिया जाता है।
फर्जी मददगार बनकर घूम रहे हैं चेहरे
विक्टोरिया और मेडिकल अस्पताल परिसर में कई संदिग्ध चेहरे खुद को सामाजिक कार्यकर्ता अथवा जनसेवक बताकर दाखिल होते हैं। इनका मुख्य काम वार्डों में भर्ती आयुष्मान कार्डधारक परिवारों की टोह लेना होता है। जहां भी किसी मरीज की जांच में मामूली विलंब होता है, ये तत्व तुरंत तीमारदारों के पास पहुंचकर सहानुभूति जताते हैं और उन्हें प्राइवेट सेंटर जाने की सलाह देने लगते हैं। यह पूरा नेटवर्क कमीशनखोरी की बुनियाद पर संचालित है, जहां प्रति मरीज स्थानांतरण के एवज में मोटी रकम बांटी जाती है। इस मिलीभगत के चलते जरूरतमंद परिवार बिना किसी जरूरत के निजी केंद्रों में स्थानांतरित कर दिए जाते हैं, जिससे शासन की जनकल्याणकारी मंशा पर गहरा आघात पहुंच रहा है
दोहरी प्रैक्टिस वाले चिकित्सकों पर सीएमएचओ की नजर
इस पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारियों और निजी प्रैक्टिस में लगे चिकित्सकों की भूमिका भी कटघरे में है। कई सरकारी चिकित्सक शासकीय सेवा के साथ-साथ निजी नर्सिंग होम से भी जुड़े हुए हैं। ऐसे चिकित्सक सरकारी संसाधनों में कमी का बहाना बनाकर परिजनों पर दबाव बनाते हैं कि अमुक निजी अस्पताल में जाएं तो वे स्वयं वहां पहुंचकर व्यक्तिगत निगरानी में बेहतर इलाज कर देंगे। इस संगठित मिलीभगत का संज्ञान लेते हुए सीएमएचओ डॉ. नवीन कोठारी ने स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सरकारी परिसरों में दलाली करने वालों, अनाधिकृत तत्वों और उनका सहयोग करने वाले कर्मियों के विरुद्ध ठोस शिकायत मिलते ही सख्त वैधानिक व विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
