जबलपुर। जिले में नर्मदा नदी के विभिन्न तटवर्ती इलाकों में रेत के अवैध खनन, भंडारण तथा अवैध परिवहन को रोकने के लिए खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग द्वारा संयुक्त रूप से लगातार जांच अभियान चलाया जा रहा है। मार्च से जून 2026 की अवधि के दौरान खिरहनी, मालकछार, पावला-जुगनपुरा, धरतीकछार और गोमखेड़ा जैसे संवेदनशील ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खनिज माफिया के खिलाफ दबिश दी गई। इन संयुक्त कार्रवाइयों में विभागों ने अवैध रूप से संचालित डंपर, हाईवा, मोटरबोट तथा पोकलेन मशीनें जब्त की हैं। अब प्रशासनिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि बार-बार पकड़े जाने वाले वाहनों और संचालकों पर दर्ज मामलों का अंतिम निराकरण किस स्तर पर पहुंचा है।
जब्त मशीनों और डंप स्टॉक का हिसाब जरूरी
विभागीय रिकॉर्ड के मुताबिक नर्मदा तटीय क्षेत्रों में कई जगह रेत का भारी अवैध डंप मिला था। 30 मई को गोमखेड़ा क्षेत्र में छापामार कार्रवाई कर लगभग 800 घनमीटर अवैध रेत का विशाल भंडारण पकड़ा गया। इसके ठीक बाद 7 जून को पावला-जुगनपुरा इलाके में टीम ने दबिश देकर एक पोकलेन मशीन, एक मोटरबोट और लगभग 30 घनमीटर रेत को जब्त किया। इसके अतिरिक्त 10 जून को इसी क्षेत्र में अभियान चलाकर 8 से 10 हाईवा वाहनों से करीब 120 से 150 घनमीटर रेत पकड़ी गई थी। लगातार हो रही इन कार्यवाहियों के बावजूद मौके पर मशीनों की जब्ती और भारी मात्रा में खनिज मिलने से यह साफ है कि माफिया बेखौफ होकर प्राकृतिक संपदा का दोहन कर रहा है।
डिजिटल निगरानी के बावजूद जारी है अवैध ढुलाई
प्रदेश में अवैध खनिज परिवहन की रोकथाम और पारदर्शी निगरानी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ई-नाका प्रणाली लागू की गई है। इस व्यवस्था के तहत आधुनिक कैमरों और डिजिटल ट्रैकिंग से गाड़ियों की जांच का नियम है, फिर भी रेत से लदे अनधिकृत वाहन मुख्य मार्गों से गुजर रहे हैं। कई बार जांच से बचने के लिए वाहनों की नंबर प्लेट पर जानबूझकर मिट्टी पोत दी जाती है या नंबर अस्पष्ट रखे जाते हैं। ऐसे में खनिज जांच चौकियों पर वाहनों के पिछले अपराध रिकॉर्ड का मिलान होना अत्यंत आवश्यक है। सिर्फ जुर्माना लगाकर वाहनों को छोड़ देने के बजाय एफआईआर दर्ज करने तथा वाहनों को राजसात करने जैसी कठोर विधिक कार्रवाई का ब्योरा सार्वजनिक होने पर ही इस नेटवर्क पर अंकुश लग सके
