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पाटन फोरलेन की आस पर लगा लालफीताशाही का ग्रहण,फाइल अटकी



जबलपुर। जबलपुर-पाटन स्टेट हाईवे को फोरलेन बनाने की बहुप्रतीक्षित योजना वित्तीय एवं प्रशासकीय पेंच में उलझ गई है। लोक निर्माण विभाग ने जबलपुर से दमोह-सागर मार्ग के इस हिस्से हेतु बजट 2025-26 में 140.25 करोड़ रुपए का प्राथमिक प्रावधान किया था, जो जीएसटी तथा अन्य अतिरिक्त व्यय जुड़ने के उपरांत 196 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। बढ़ी हुई लागत की यह पत्रावली बीते 1 वर्ष से अधिक समय से वित्तीय स्वीकृति समिति यानी एफएसी के पास अनिर्णित पड़ी है। माढ़ोताल नाला क्षेत्र, पाटन, मझौली, कटंगी, तेंदूखेड़ा और रहली जैसे प्रमुख आंचलिक संपर्क मार्गों को प्रभावित करने वाली इस परियोजना में वर्तमान 7 हजार से कुछ अधिक सीपीयू क्षमता, जमीन अधिग्रहण की अड़चनों तथा 56 करोड़ रुपए के अतिरिक्त वित्तीय भार ने तकनीकी एवं वित्तीय सहमति की राह में गतिरोध उत्पन्न कर दिया है।

​प्रशासनिक स्तर पर ट्रैफिक घनत्व के कड़े मापदंड

​फोरलेन निर्माण की अनिवार्य पात्रता हेतु निर्धारित 10 हजार सीपीयू के मानक के विरुद्ध वर्तमान में इस मार्ग पर गणना मात्र 7 हजार दर्ज की गई है। विभागीय अधिकारियों ने तर्क दिया है कि अधोसंरचना विस्तार के बाद वाहन दबाव तेजी से 15 हजार सीपीयू पार कर जाएगा, जिस पर समिति ने तत्काल सहमति नहीं दी। सड़क निर्माण की कुल 25 किलोमीटर परिधि में से 5 किलोमीटर का जबलपुर छोर पूर्व से ही फोरलेन है, जबकि शेष 20 किलोमीटर के दायरे में कार्य प्रस्तावित है। कुल राशि में से 135 करोड़ रुपए शुद्ध सिविल निर्माण कार्यों के लिए चिन्हित किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार 2024 के एसओआर दरों पर आधारित होने के कारण आगे वित्तीय भार नहीं बढ़ेगा।

​माढ़ोताल नाला सुधार व 15 किलोमीटर ड्रेनेज प्लान

​मार्ग की सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती माढ़ोताल नाले को एनएचएआई के सुरक्षा मानकों के अनुरूप विकसित करने तथा पाटन तक 15 किलोमीटर लंबी जल निकासी नाली तैयार करने की है। इसके निमित्त आवश्यक निजी भूमि अधिग्रहण से समयावधि और बजट दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका समिति ने जताई है। वर्तमान में कटंगी-दमोह होकर सागर तक 180 किलोमीटर की दूरी तय करने में अत्यधिक समय लगता है, जबकि तेंदूखेड़ा-रहली होकर नया मार्ग बनने पर यह फासला घटकर 154 किलोमीटर रह जाएगा। भारी वाहनों के अनवरत आवागमन से 25-30 मिनट की सामान्य दूरी तय करने में एक घंटे से अधिक समय लग रहा है और दुर्घटनाएं भी बढ़ रही हैं।

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