जबलपुर। सेठ गोविंददास विक्टोरिया अस्पताल में एमआरआई सेंटर शुरू हुए अभी एक महीना भी नहीं बीता कि यहां निजी अस्पतालों के बिचौलियों ने अपना जाल बिछा लिया है। सरकारी सुविधा में जांच का शुल्क केवल 1340 रुपए निर्धारित है, जबकि दलाल असहाय मरीजों से 200 से 3000 रुपए तक की अवैध वसूली कर रहे हैं। बाजार भाव से चार गुना कम खर्च होने के चलते यह पूरा गिरोह सक्रिय हुआ है। इस अंधेरगर्दी की शिकायत मिलने पर सीएमएचओ डॉ नवीन कोठारी ने तुरंत एक्शन लेते हुए नोडल अधिकारी के पद पर डॉ वैशाली खन्ना को तैनात किया है, जो पूरी जांच-पड़ताल और संतुष्टि के बाद ही किसी भी व्यक्ति को जांच के लिए आगे भेजेंगी।
फर्जीवाड़े पर रोक लगाने लागू होगा मेडिकल मॉडल
बिचौलियों की मनमानी पर पूरी तरह लगाम लगाने के मकसद से स्वास्थ्य विभाग अब नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल की तर्ज पर पूरी व्यवस्था संचालित करने की तैयारी में जुट गया है। मेडिकल कॉलेज की निर्धारित कार्यप्रणाली के मुताबिक वहां बाहर से आने वाले किसी भी सामान्य व्यक्ति की सीधी जांच नहीं की जाती है। इस प्रक्रिया में सबसे पहले बीमार व्यक्ति को अस्पताल के वार्ड में बाकायदा भर्ती किया जाता है। इसके उपरांत 3 अधिकृत चिकित्सा अधिकारियों की लिखित अनुशंसा और हस्ताक्षर मिलने के पश्चात ही संबंधित व्यक्ति का एमआरआई टेस्ट संभव हो पाता है। विक्टोरिया प्रबंधन भी अब इसी सख्त प्रोटोकॉल को अपनाकर बाहरी अनाधिकृत तत्वों के प्रवेश पर पूर्ण पाबंदी लगाने जा रहा है।
मशीन की खराबी से बढ़ा भारी दबाव
संभाग के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज में स्थापित एमआरआई यूनिट पिछले एक सप्ताह से अचानक तकनीकी खराबी आ जाने के कारण पूरी तरह ठप पड़ी है। इस खराबी की वजह से वहां पहुंचने वाले गंभीर लोगों को लगातार विक्टोरिया रेफर किया जा रहा है, जिससे जिला चिकित्सालय के नए केंद्र पर क्षमता से अधिक काम का दबाव अचानक बढ़ गया है। एक तरफ तकनीकी विशेषज्ञ मेडिकल की बंद पड़ी यूनिट को दुरुस्त करने की मशक्कत में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिला अस्पताल में उमड़ रही अप्रत्याशित भीड़ का अनुचित फायदा उठाकर निजी एजेंट लाचार परिजनों को बहला-फुसलाकर ठगने की कोशिशों में लगे हैं। नया सुरक्षा घेरा तैयार होने से वास्तविक जरूरतमंदों को समय पर राहत मिलेगी।
